Manoj kumar
जीवन का मंत्र संगीत और योग है
21 जून का दिन खास है, क्योंकि दिन
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और विश्व संगीत दिवस, दोनों मनाए जाते हैं. दोनों विधाएँ
मिलकर न सिर्फ मानसिक शान्ति और संबल प्रदान करती हैं, बल्कि कोरोना को हराने के
लिए जरूरी रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं. संगीत
जगत से जुड़े कलाकार मानते हैं कि योग और संगीत हैं एक-दूसरे के पूरक है........
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| योग और संगीत |
विभिन्न शोध अध्ययन में कहा गया है कि संगीत
सुनने या गुनगुनाने से आपकी मानसिक स्थिति बेहतर होती है, जबकि योग शारीरिक और
मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी हैं. संगीत और योग के मेल पर भजन गायक
अनूप जलोटा का कहना है कि कमजोर इन्सान गाना नहीं गा सकता है. इसके लिए स्वस्थ
शरीर के साथ सांसों का साथ देना भी जरूरी है. योग के कुछ आसन आपकी सांसों को मजूबत
बनाते हैं. मैं कितना ही व्यस्त क्यों न रहूँ, रोजाना एक से डेढ़ घंटे योगासन,
प्राणायाम और मेडिटेशन करता हूँ. ये मेरी संगीत साधना का अहम हिस्सा हैं.
मिलकर बनाएँगे पृथ्वी सुरक्षित :
संगीत और योग का मेल संतुलित मस्तिष्क औरजीवन के लिए जरूरी है. योग संगीत जगत से जुड़े हुए लोगों की जिन्दगी का अहम हिस्सा है. गायक कैलाश खेर का कहना है कि संगीत और योग ही हैं, जो पृथ्वी को बचाएंगे. दवाओं से तो शारीरिक रोग दूर होते हैं, लेकिन मानसिक रोग तो योग से ही दूर होंगे. कोरोना संकट में उपजे तनाव से दूरी बनाए रखने में संगीत एक मजबूत सहारा रहा है. सुख की घड़ी हो या दुःख की, संगीत हमारे जीवन का पूरक रहा है, पुराने गानों में समर्पण दिखता था, जैसे कोई आराधना हो रही हो. प्रेम को हल्के में नहीं लिया जाता था. मेरे गानों में अध्यात्म ही झलक है. आध्यात्मिक संगीत थेरेपी की तरह होता है. आप उसमें रम जाते हैं. संगीत और योग आपके तनाव को दूर कर देता है. मेरे घर में योग का माहौल है.
सांमजस्य से होती साधना पूरी :
गौर करें तो योग और संगीत दोनों के लिए माहौल भी
कमोबेश एकसमान होता है. इस संबंध में गायिका शिल्पा राव कहती हैं कि संगीत हो या
योग, दोनों सी साधना हैं. उन्हें आपको एकाग्रचित होकर करना होता है. दोनों ही
स्वास्थ्य के लिए फायदेमन्द हैं और आपको प्रसन्न रखते हैं. ये आपमें ऊर्जा का
संचार करते हैं. आपके बिगड़े मूड को भी बना देते हैं. संगीत में स्वरों की श्द्धता
पर जोर दिया जाता है, वहीँ योग में आसन और मुद्राओं पर ध्यान केन्द्रित रहता है. दोनों
में ही स्वर व मुद्रा की श्रेष्ठता से आनन्द और स्वास्थ्य पाया जा सकता है. इस
दृष्टि से दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. संगीत में एक ही स्थान पर साधना करने के
लिए शरीर, मन व मस्तिष्क पूर्ण स्वस्थ होना चाहिए. उसमें योग अहम भूमिका निभा सकता
है.
योग और संगीत कला है:
गायक जुबिन नौटियाल का मानना है कि योग और संगीत
दोनों ही कला से जुड़े हैं. योग में आपको अपना मस्तिष्क एक जगह पर केद्रित करना
होता है, ठीक उसी तरह जैसे संगीत बनाते वक्त आपको अपना सौ प्रतिशत ध्यान लगाना
होता है. योग और संगीत एक साथ चलते हैं. दोनों ही संतुलित जीवन और मस्तिष्क के लिए
बहुत काम आते हैं.
तन मन की शुद्धता का स्रोत :
संगीत की बात हो और उसमें भक्ति रस का जिक्र न
आए, ऐसा तो संभव ही नहीं. भक्ति आधारित संगीत भले ही फिल्मों में कम दिखता है,
लेकिन इसके प्रति लगाव कभी कम नहीं होता. अनूप जलोटा कहते हैं कि फिल्म में
भजन हो या न हो, भक्ति संगीत अमर रहेगा. लोग भजन से कभी दूर नहीं होते. जिस तरह से
योग आपके तनाव को दूर करता है उसी तरह ईश्वर की भक्ति में लीन होने पर आप अपने
सारे तनावों और दुखों को भूल जाते हैं. यह संगीत का चमत्कार होता है. दरअसल, योग
और संगीत के खूबसूरत सामंजस्य का उद्देश्य तन के साथ मन की शुद्धता को हासिल करना
है.स्वरों की उपासना, रियाज,शास्त्र सम्मत पद्धति द्वारा नाद ब्रह्म की आराधना कर
अंतर्मन में गहराई तक उतारना संगीत का मुख्याल लक्ष्य है. संगीत शास्त्र व
अध्यात्म जड़े हुए हैं,क्योंकि दोनों का उद्देश्य एकसमान है. दोनों में आत्म
साक्षात्कार होता है.
संगीत को सुनते हुए करें योग :
वेस्ट वर्जीनिया यूनिर्वसिटी के स्कूल ऑफ़ पब्लिक
हेल्थ की प्रोफेसर किम इन्स ने अपने शोध अध्ययन में वैज्ञानिक तरीके से तस्दीक की
है कि जब बात संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की हो तो मेडिटेशन और म्यूजिक
दोनों समान रूप से कारगर हैं. संगीत ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल के स्तर को कम करता
है,वहीँ योगासन के अंतर्गत ध्यान और प्रणायाम के जरिए तनाव, ब्लड प्रेशर पर
नियंत्रण, दिल की जिसकी वजह से मन प्रसन्न और शारीरिक निरोगी रहता है. संगीत सुनते
हुए ध्यान और योग करने का विचार बेहतरीन है.







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