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बुधवार, 5 अगस्त 2020

बालों के लिए जादुई आहार : healthy food for hair growth II care of hair

Manoj kumar

बालों के लिए जादुई आहार : healthy food for hair growth II care of hair

बालों को सुन्दर और स्वस्थ्य बनाने के लिए हमारे कीचन में ही हैं जादुई और चमत्कारी आहार. डाईटिशियंस और ब्यूटी एक्सपर्ट्स बता रही हैं बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए कुछ पोषक आहार के बारे में...

बालों के लिए जादुई आहार : healthy food for hair growth II care of hair

अच्छी सेहत के लिए दूध और बादाम आदि खाने की बात आप बचपन से सुनती आ रही होंगी. ये सभी चीजें बालों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं. जितनी अच्छी डाईट होगी और उसमें जितने पौष्टिक तत्व शामिल होंगे, आपके बाल उतने ही अच्छी होंगे. आइए जानते हैं, बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपकी रसोई में मौजूद कौन सी चीजें पौष्टिक और चमत्कारी साबित हो सकती हैं.

दूध : दूध की शक्ति का कोई मुकाबला नहीं है. इसके सेवन से मजबूत और चमकदार बाल पाए जा सकते हैं. यहाँ तक कि रूखे, बेजान और उलझे बालों की मुसीबत से भी छुटकारा पाया जा सकता है. बाल प्रोटीन से बने होते हैं और दूध में प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है. इसलिए इसका इस्तेमाल रोजाना करना चाहिए, खासतौर पर शाकाहारी लोगों को. इसमें फैट, कार्बोहाइड्रेटस, विटामिन्स और तरह-तरह के मिनरल्स होते हैं. विटामिन्स मसलन फोलेट, बी-6 और बायोटिक बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी होते हैं. दूध में कैल्शियम, आयरन, जिंक भी होता हिया. यह बालों को जड़ से मजबूत बनाता है. अगर आप वेट कांशियस हैं तो आपको दैनिक रूप से लो फैट मिल्क का इस्तेमाल करना चाहिए. दूध का प्रयोग बालों पर भी किया जा सकता है. दूध में शहद और मेथी दाना पाउडर मिलाकर हेयर मास्क की तरह प्रयोग किया जा सकता है.

जैतून का तेल :

आलिवल आयल में विटामिन्स ए, बी, सी, डी और ई के साथ-साथ आयरन भी होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंटस होते हैं. इसमें नारिशिंग, माईश्चराइजिंग और कंडिशनिंग प्रापर्टीज होती हैं, जो बालों की लचक, कोमलता और मजबूती बढ़ाने में सहायक होती हैं. यह ओमेगा-9 फैटी एसिड का एक बेहतरीन स्रोत है. इसका प्रयोग हॉट आयल ट्रीटमेंट या नारिशिंग हेयर मास्क में किया जा सकता है. आलिव आयल की थोड़ी सी मात्रा बालों का रूखापन, उलझन और कड़ापन दूर करने के लिए काफी है. यह बालों को रेशमी मुलायम बनाने में भी मदद करता है.आलिव आयल हेयर ट्रीटमेंट बालों में केमिकल्स के प्रयोग से हुए नुकसान और तनाव को कम करता है. आलिव आयल बालों में लगाने से उनमें मजबूती के साथ-साथ चमक भी आती है.

शहद :

शहद का इस्तेमाल विभिन्न रोगों के उपचार और वजन नियंत्रण के लिए किया जाता है. आयुर्वेद में तो इसका इस्तेमाल बहुत उपयोगी माना जाता है. ब्यूटी एवं स्किन केयर एक्सपर्ट्स के मुताबिक शहद में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, विटामिन बी और सी, एंजाइम्स और एमिनो एसिड पाए जाते हैं, जो सेहत के साथ-साथ सौन्दर्यबढ़ाने में भी सहायक होते हैं. यह बालों और त्वचा के लिए कुदरती माइश्चराइजर का काम करता हैं. यह एक प्रकार की भ्रांति ही है कि बालों में शहद का प्रयोग करने से वे सफ़ेद होने लगते हैं. ऐसे मानना लगता है. शहद कोई ब्लीचिंग एजेंट नहीं हैं. शहद बालों को नर्म, मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाने में मदद करता है.

बादाम :

बालों के लिए कुदरत का वरदान है यह. इसमें आयरन, कॉपर, फास्फोरस, विटामिन बी-1 और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है. यह शरीर में हिमोग्लोबिन को बढाता है और नए केशों का विकास करता है. इससे बाल स्वस्थ रहते हैं. बादाम के तेल में दो-तीन टीस्पून बादाम का दूध मिलाकर सिर की त्वचा पर लगाने से वे मजबूत और घने होते हैं. बादाम मेवों में राजा है. इसमें भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें विटामिन ई काफी मात्रा में पाया जाता है, जो एक मजबूत एंटीऑक्सीडेंट है. यह बालों को प्रदूषण और यूवी किरणों से बचाता है. बालों के गिरने का एक बड़ा कारण शरीर में जिंक की कमी होती है और बादाम में जिंक की पर्याप्त मात्रा होती है. बादाम को रात में भिगोकर छिलका उतारकर खाने से बाल व त्वचा दोनों में चमक और निखार आ जाता है. इसे फेसपैक में मिलाकर लगाने से त्वचा बेदाग और गोरी हो जाती है.

करी पत्ता :

करी पत्ता का इस्तेमाल ग्रेवी या करी बनाने में खूब किया जाता है. यह बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन बी-1, बी-2, बी-3, बी-9 और सी भरपूर होते हैं. यह बीटाकैरोटिन युक्त होता है.इसके अलावा इसमें बाल काले और चमकदार बनते हैं. ऐसी माएं जिनके बाल असमय सफ़ेद हो गए हों, वे अपनी बेटियों के बाल करी पत्ता के प्रयोग से सफेद होने से बचा सकती हैं. 10-15 करी पत्ता भी पीस लें. इस पेस्ट को सिर की त्वचा पर लगाकर करीब दस मिनट तक सिर की मसाज करें. इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धुलें. हफ्ते में एक बार ऐसा करने से कुछ ही हफ़्तों में अंतर नजर आएगा.  


शनिवार, 1 अगस्त 2020

निमोनिया पर होगी जीत : II निमोनिया कैसे होता है II निमोनिया रोग कैसे होता है II निमोनिया कैसे ठीक होता है II निमोनिया के लक्षण II nimoniya ke lakshan II nimoniya ke lakshan in hindi

Manoj kumar

निमोनिया पर होगी जीत : II निमोनिया कैसे होता है II निमोनिया रोग कैसे होता है II निमोनिया कैसे ठीक होता है II निमोनिया के लक्षण II nimoniya ke lakshan II nimoniya ke lakshan in hindi 

सर्दियों के मौसम में निमोनिया के मामले कहीं ज्यादा बढ़ जाते हैं लेकिन समय रहते कुछ सुझावों पर अमल कर इस रोग से जहाँ बचा जा सकता है वहीँ इस मर्ज का कारगर इलाज भी संभव है........

फेफड़े में संक्रमण (इन्फेक्शन) को निमोनिया कहा जाता है. यह इन्फेक्शन ज्यादातर मामलों में जीवाणुओं (विक्ट्रीया) के कारण होता है. इस मर्ज में एक या दोनों फेफड़ों के भागों में सूजन आ जाती है और फेफड़ों के भागों में सूजन आ जाती है और फेफड़ों के भागों में सूजन आ जाती है और फेफड़ों में पानी भी भर जाता है.

कारण :

न्यूमोकोकस, हिमोफिलस, लेजियोनेला, माइकोप्लाज्मा, क्लेमाइडीया और स्यूडोमोनास और स्यूडोमोनास आदि जीवाणुओं से निमोनिया होता है. इसके अलावा कई वायरस (जो इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू के वाहक हैं), फंगस और परजीवी रोगाणुओं के कारण भी निमोनिया होता है.

भारत में प्रतिवर्ष संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में से लगभग 20 फीसदी निमोनिया की वजह से होती है. इसके अलावा अस्पताल में होने वाले संक्रामक रोगों में यह बीमारी दूसरे स्थान पर है.

इन्हें है ज्यादा खतरा :

वैसे तो यह संक्रमण कीसी को भी हो कसता है, पर कुछ बीमारियाँ और स्थितियां ऐसी हैं, जिसमें निमोनिया होने का खतरा अधिक होता है. जैसे शराब और नशे से पीड़ित मरीज, हृदय, फेफड़े और लीवर की बीमारियों के गंभीर मरीज. इसी तरह डायबिटीज, गंभीर किडनी मरीज. इसी तरह डायबिटीज, गंभीर किडनी रोग, वृद्ध, कम उम्र के बच्चे और नवजात शिशु, कैंसर और एड्स के मरीज. ऐसे मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है.

संक्रमण तीन तरह से :

सांस के रास्ते: खांसने या छींकने से.

खून के रास्ते: डाईलिसिस से कारण अस्पताल में ऐसे मरीज जो लंबे समय से इंट्रा-वीनस फ्लूड पर हैं, या दिल के ऐसे मरीज जो पेस मेकर पर हैं.

एसपिरेशन: खाद्द पदार्थों के साँस की नली में चले जाने को एसपिरेशन कहते  हैं.

जांचे : खून की जाँच, सीने का एक्स-रे बलगम की जाँच, सीने का एक्स-रे, बलगम की जाँच और कल्चरी जाँच आदि.

प्रमुख लक्षण : nimoniya ke lakshan II nimoniya ke lakshan in hindi II nimoniya ke upchar II nimoniya ka ayurvedic upchar II

तेज बुखार (जोड़ों में दर्द के साथ)

खाँसी और बलगम (जिसमें कई बार खून के छींटे भी हो सकते हैं.)

सीने में दर्द और सांस फूलना.

कुछ मरीजों में दस्त, मतली और उल्टी आना.

व्यवहार में परिवर्तन जैसे मतिभ्रम, चक्कर आना, भूख न लगना, मांशपेशियों में दर्द, सर्दी लगाकर शरीर ठण्डा पड़ जाना, सिरदर्द और त्वचा का नीला पड़ना आदि.

प्रमुख इलाज : एंटीबायटिक्स दवाओं से इलाज होता है. इन दवाओं का इलाज मरीज की बीमारी का कारण बने जीवाणु पर निर्भर करता है. अधिकतर मरीज बाह्य रोगी विभाग द्वारा इलाज करा सकते हैं, पर अगर यह मर्ज किसी अन्य बीमारी के साथ जुड़ा हुआ है और 60 साल से अधिक की उम्र के व्यक्ति को हुआ है या रोगी गंभीर रूप से बीमार है, तो अक्सर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराना पड़ सकता है. एंटीबायोटिक दवाओं के अतिरिक्तअगर मरीज को साँस तेजी से फूल रही है, तब पीड़ित व्यक्ति को ऑक्सीजन भी दी जाती है.

बचाव :

चूँकि यह बीमारी ठण्ड के मौसम में ज्यादा होती है. इसलिए ठंडे से बचना चाहिए-खासकर बच्चों और वृद्ध लोगों को.

धूमपान, शराब और सभी तरह के नशा को नियंत्रण में रखना. मधुमेह के मरीजों को अपने डॉ. से शुगर की नियमित जाँच करवाते रहना चाहिए और शुगर को नियंत्रण में रखना चाहिए.

निमोनिया का सबसे प्रमुख कारण न्यूमोकोकस नामक जीवाणु है. इससे बचने का वैक्सीन (टीका) उपलब्ध है, जिसे न्यूमोकोकल वैक्सीन कहते हैं.  


बुधवार, 29 जुलाई 2020

ऐसे बचें दम घुटने से II दमा के शुरुआती लक्षण II दमा के उपचार II Chronic obstructive pulmonary disease II chronic obstructive pulmonary disease (copd) II chronic obstructive pulmonary disease treatment II lung disease symptoms II दमा के लक्षण हिंदी II दमा खांसी II अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है II अस्थमा कैसे फैलता है

Manoj kumar

ऐसे बचें दम घुटने से II दमा के शुरुआती लक्षण II दमा के उपचार II Chronic obstructive pulmonary disease II chronic obstructive pulmonary disease (copd) II chronic obstructive pulmonary disease treatment II lung disease symptoms II दमा के लक्षण हिंदी II दमा खांसी II अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है II अस्थमा कैसे फैलता है

ऐसे बचें दम घुटने से II दमा के शुरुआती लक्षण II दमा के उपचार II Chronic obstructive pulmonary disease II chronic obstructive pulmonary disease (copd) II chronic obstructive pulmonary disease treatment II lung disease symptoms II दमा के लक्षण हिंदी II दमा खांसी II अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है II अस्थमा कैसे फैलता है
 

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic obstructive pulmonary disease) (सीपीओडी) फेफड़ों से संबंधित गंभीर बीमारी है. इस मर्ज में फेफड़ों के टिश्यूज के क्षतिग्रस्त होने के परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति अच्छी तरह से साँस नहीं ले पाता. कालान्तर में यहस समस्या बद से बदतर होती जाती है.............


68 वर्षीय सुरेन्द्र कुमार अपने बेटे का सहारा लिए खाँसते हुए मेरे क्लीनिक पहुँचे. उस वक्त साँस लेने में उन्हें दिक्कत हो रही थी. चेकअप और जांचों के निष्कर्ष से पता लगा कि वह क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से ग्रस्त हैं और कई महीनों से खाँसी का इलाज भी चल रहा था. वह धुमपान की लत के शिकार थे और पिछले कई महीनों से खाँसी, साँस में तकलीफ और बलगम बनने की शिकायत से ग्रस्त थे. रोगी ने मुझसे पूछा कि मैं कितने में ठीक हो जाऊँगा? इस पर मैंने जवाब दिया कि आपको जो रोग है, उसे काबू में तो रखा जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त (क्योर) नहीं किया जा सकता है. यह सुनकर रोगी के चेहरे पर निराशा नजर आयी, लेकिन मैंने जब रोगी को यह बताया कि सीओपीडी से पीड़ित लोगों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम के अंतर्गत व्यायाम, रोग का प्रबन्धन और उसकी काउंसिलिंग भी की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप वह बीमारी के होते हुए भी सामान्य जिन्दगी जी सकता है, तब उनका चेहरा ख़ुशी से दमक उठा. मैंने उन्हें यह भी बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए किस तरह रोगी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है.

लक्षणों के बारे में :

    1.            सबसे पहले रोगी को खाँसी आती है. 

    2.            खाँसी के साथ बलगम भी निकलता है. पीड़ित व्यक्ति की साँस फूलती है.

    3.            रोगी लंबी अवधि तक गहरी साँस नहीं ले पाता. कालान्तर में यह स्थिति बिगड़ती जाती है. व्यायाम करने के बाद तो मरीज की हालत और भी बिगड़ जाती है. 

 4.    सीओपीडी की गंभीर अवस्था कॉरपल्मोनेल की समस्या पैदा कर सकती है. कॉरपल्मोनेल की स्थिति में हृदय द्वारा फेफड़ों को रक्त की आपूर्ति करने में उसे अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ता है. कॉरपल्मोनेल के लक्षणों में एक लक्षण पैरों और टखने में सूजन आना है.

    5.            तेज खाँसी आने से पीड़ित व्यक्ति को कुछ समय के लिए बेहोशी भी आ सकती है.

    6.            मुख्य तौर पर यह बीमारी 40 साल के बाद ही शुरू होती है, लेकिन कभी-कभी इस उम्र से पहले भी व्यक्ति सीओपीडी से ग्रस्त हो सकता है.

    7.            बीमारी को गंभीर स्थिति में रोगी को साँस अंदर लेने की तुलना में साँस बाहर छोड़ने में ज्यादा वक्त लग सकता है.

    8.            रोगी द्वारा थकान महसूस करना और उसके वजन का कम होते जाना.

बेहतर है बचाव :

    1.            डॉक्टर के परामर्श से हर साल इन्फ्लूएंजा की और न्युमोकोकल (न्यूमोनिया से संबंधित) वैक्सिनें लगवानी चाहिए. 

    2.            धूमपान कर रहे व्यक्ति के करीब न रहें. ऐसा इसलिए, क्योंकि जब धूमपान न करने वाले व्यक्ति के लिए कहीं ज्यादा नुकसान देह हो सकता है. 

    3.            धूल, धुएँ और प्रदूषित माहौल से बचें. 

    4.            रसोईघर में गैस और धुएँ की निकासी के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.

जाँच की बात :

सीओपीडी की सबसे सटीक जाँच स्पाईरोमीट्री नामक परिक्षण है.

इलाज के बारे में :

सीओपीडी को नियंत्रित करने में स्टेरॉयड इनहेलर्स और एंटीकॉललीनेर्जिक टेबलेट्स की भूमिका महत्वपूर्ण है. अधिकतर दवाएं इनहेलर के रूप में इस्तेमाल की जाती है. कभी-कभी सीओपीडी की तीव्रता बहुत बढ़ जाती है, जिसे ‘एक्यूट एक्सासरबेशन’ कहते हैं. इस स्थिति का मुख्य कारण फेफड़ों में जीवाणुओं का संक्रमण होता है. इस संक्रमण के चलते फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है. रोगी के बलगम का रंग बदल जाता है, जो सफेद से रहा या पीला हो जाता है. रोगी तेजी से साँस लेता है और उसके हृदय की धड़कन बढ़ जाती है. यहीं नहीं, ‘एक्यूट एक्सासरबेशन’ की स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है. सीओपीडी में मौत होने का मुख्य कारण यही स्थिति होती है. इस गंभीर स्थिति में रोगी को बाईपैप थेरेपी और ऑक्सीजन दी जाती है.   

क्या है कारण :

डॉक्टर का कहना है कि ‘सीओपीडी’ का एक प्रमुख कारण धुम्रपान है. अगर रोगी इस लत को नहीं छोड़ता, तो उसकी बीमारी गंभीर अख्तियार रूप कर सकती है. धूमपान से कालान्तर में फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. फेफड़ों में सूजन आने लगती है, उनमें बगलम जमा होने लगता है. फेफड़े की सामान्य संरचना विकारग्रस्त होने लगती है. वही जो महिलाएं ग्रामीण या अन्य क्षेत्रों में चूल्हे पर खाना बनाती हैं, उनमें सीओपीडी से ग्रस्त होने के मामले कहीं ज्यादा सामने आते हैं. वहीँ जो लोग रासायनिक संयंत्रों में या ऐसे कार्यस्थलों में कार्य करते हैं, जहाँ के माहौल में कुछ नुकसानदेह गैसें व्याप्त हैं, तो यहाँ स्थिति सीओपीडी के जोखिम को बढ़ा सकती है. इसी तरह सर्दी-जुकाम की पुरानी समस्या भी इस रोग के होने की आशंका को बढ़ा देती है.

इन बातों पर दे ध्यान :-

प्राथमिक लक्षण म: साँस गहरी न ले पाना, खाँसी आना और बगलम बनना.

कारण : प्राथमिक कारण धूमपान करना है. इससे फेफड़ों में सूजन आ जाती है. अस्थमा (दमा) तो नियंत्रित हो जाता है, लेकिन दमा की तुलना में सीओपीडी को नियंत्रित करना कहीं ज्यादा मुश्किल है. कालान्तर में यह रोग बद से बदतर हो जाता है.

कैसे काबू करें : धूमपान छोड़े. वैक्सीन लगवाएं. रोग से पीड़ित लोगों के पुनर्वास की जरूरत होती है. अक्सर रोगी को ‘इन्हेल्ड ब्राकोडाइलेटर्स’ की जरूरत पड़ती है. कुछ पीड़ित लोगों को लंबे समय तक दी जाने वाली ऑक्सीजन थेरेपी से लाभ मिलता है. रोग की गंभीर स्थिति में फेफड़े के प्रत्यारोपण की भी आवश्यकता पड़ सकती है.


शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

coronavirus update II coronavirus update india II कोरोनावायरस अपडेट II कोरोना वायरस अपडेट इन इंडिया II

Manoj kumar

coronavirus update II coronavirus update india II कोरोनावायरस अपडेट II कोरोना वायरस अपडेट इन इंडिया II


कोरोना संक्रमण का खतरा आम से लेकर खास यानी हर किसी को है. इससे घबराएं नहीं, बल्कि बचने के सभी कारगर उपाय आजमाएँ और सकारात्मक सोच के साथ यह स्वीकार करें कि यह दौर भी गुजर जाएगा.....
corona virus
कोरोनावायरस अपडेट II कोरोना वायरस अपडेट इन इंडिया 

कोविड-19 के बारे में जैसा कि कहा जा रहा है कि यह चीन के वुहान शहर से फैला और दुनिया के 200 से अधिक देशों में महामारी बनकर कोहराम मचा रहा है. बीते पाँच माह से हर ओर घबराहट और डर का माहौल है लेकिन यह डरने का वक्त नहीं, बल्कि इसके प्रति सतर्कता बरतते हुए संक्रमण से बचने का है. इस तरह के वायरस के संक्रमण का यह कोई पहला मामला नहीं है. सन् 1918-19 में स्पेनिश फ्लू, 2002-2003 में सार्स, 2005 में फ्लू, 2009-2010 में स्वाइन फ्लू, 2014-2015 में इबोला और अब कोविड-19 ने खतरा फैलाया हुआ है. कोविड-19 एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए 30 जनवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया. तब से लेकर अब तक इसकी चपेट में दुनिया के लाखों लोग आ चुके हैं और लाखों लोगों की मौत भी हो चुकी है. हालांकि जिस तरह से लोग स्वस्थ होकर घर लौटकर रहे हैं, उससे यह साबित हो चुका है कि सावधानी के साथ सही जीवन शैली अपनाना और इससे बचने के सारे उपायों का पालन करना ही संक्रमण से बचने का पुख्ता इंतजाम है.


तीन तरह से फैलता है वायरस :-


इस वायरस का संक्रमण एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में मुख्यतः तीन प्रकार से फैलता है. यदि कोई व्यक्ति कोरोना पाजिटिव है तो उसके खांसने, छींकने या बात करने में लार की अतिसूक्ष्म बूंदे हवा या आसपास की जगहों पर गिर जाती हैं, जो संक्रमण का कारण बनती हैं. यदि कोई स्वास्थ्य व्यक्ति छींकते या खाँसते समय किसी संक्रमित व्यक्ति के करीब खड़ा है या उन वस्तुओं को छू लेता है, जहाँ रोगी के ड्रापलेट्स गिरे हैं तो स्वस्थ व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ जाता है. सामान्यत: किसी संक्रमित रोगी के ड्रापलेट 6 फीट (दो गज) से ज्यादा दूर नहीं जा पाते हैं और हवा में ज्यादा देर तक टिकते भी नहीं हैं. अभी तक के निष्कर्षों के अनुसार यह हवा में 3 घंटे से अधिक देर तक नहीं टिक पाते हैं.


संक्रमण से बचाव और सावधानियाँ : coronavirus prevention


शारीरिक दूरी बनाकर रखें. आवश्यक न हो तो मेल-मुलाक़ात से बचें. हाथ मिलाने की जगह नमस्कार करें. भीड़भाड़ वाली जगहों पर कम से कम जाएँ. हमेशा मास्क का प्रयोग करें, इसमें सर्जिकल मास्क, रुमाल, गमछा या दुपट्टा भी प्रयोग में लाया जा सकता है. हाथों को साबुन, रनिंग वाटर और सेनेताईजर या पेपर-सोप से थोड़ी-थोड़ी देर में 20 सेकेण्ड तक धोएं.

इम्युनिटी है संक्रमण से बचाव का कवच : coronavirus prevention, coronavirus antibodies immunity, coronavirus immunity, कोरोना वायरस इम्युनिटी


किसी भी रोग से लड़ने के लिए हमारी इम्युनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है और इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है, हमरा खानपान. ध्यान रहे कि हमें घर का बना पौष्टिक खाना ही खाना है और बाहर के खाने और फ़ास्टफ़ूड से दूरी बनानी है. बच्चों को कोरोना संक्रमण के बारे में पर्याप्त जानकारी दें. साथ ही उन्हें सकारात्मक तरीके से समझाएं कि बाहर का माहौल सेहत के लिहाज से सुरक्षित नहीं झी. हालांकि हमारे कोरोना वारियर्स इसके लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं और स्थितियां जल्द ही बेहतर हो जाएंगी. हर बुराई के पीछे अच्छाई छुपी होती है, इसलिए यह मान लें कि कोविड-19 ने हमें स्वस्थ जीवनशैली अपनान के लिए प्रेरित किया है. संक्रमण के दौर में हमें अपना इसे दृढ़ बनाने के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं.

तनाव से रहें दूर :


काम का दबाव न कोरोना संक्रमण से पहले कम था, न अभी कम है. इसलिए यह हम पर निर्भर है कि हम किसी भी तरह के तनाव या मानसिक दबाव के शिकार नहीं होंगे. बुजुर्गों का अनुभव, किस्से व पुराने कहानियाँ बच्चों के दिमाग पर सकारात्मक असर डालती है. घर में हैं तो परिवार के साथ इस मौके का लुत्फ़ उठाइए. खाली समय में मनपसंद संगीत सुनें, डांस करें और हंसी मजाक का माहौल बनाएं. ये सारे उपाय आपके आत्मबल को मजबूत बनाएँगे. अध्यात्म से जुड़ा व्यक्ति हर तरह से काफी मजबूत होता है और यही मजबूती उसे विषम परिस्थितियों से निपटने के साहस देती है. अध्यात्मिक इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए ईश्वर में ध्यान लगाएं और जरूरतमंदों की यथासंभव सहायता करें. किसी परेशानी में फंसे व्यक्ति की मदद करना अपने आप में एक अध्यात्म है.घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बनाएं रखें.

कोरोना वायरस सबसे पहले हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए प्राणायाम जरूर करें. यह फेफड़ों के लिए वैक्यूम क्लीनर की तरह है. इसे तरह के संक्रमण से लड़ने की ताकत मिलती है. नियमित भाप लेना भी फेफड़ों के लिए लाभकारी है. इससे सीओपीडी, अस्थमा, एलर्जी आदि के मरीजों को बहुत राहत मिलती है और संक्रमण का खतरा कम रहता है.

कोविड-19 का परिक्षण :


कोविड-19 के संक्रमण से बचाने का सरकार हर प्रयास कर रही है. इसके लिए हर जिले में हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं. यदि संक्रमित हैं तो सूचित करिए. आपसे कोरोना संक्रमण से संबंधित कुछ सवाल किए जाएँगे और यदि जरूरी होगा तो
कोविड-19 परिक्षण किया जाएगा.

सतह या वस्तु पर वायरस की सक्रियता : how does coronavirus spread, how long does coronavirus last, how long does coronavirus last on paper, how long does coronavirus last on clothes, how long does coronavirus last on clothes fabric, how long does coronavirus last on clothes and surfaces,


अभी तक के नतीजों के अनुसार कोरोना वायरस किसी सतह या वस्तु पर अलग-अलग समय तक सक्रिय रहता है. हवा में 3 घंटे, तांबे पर 4 घंटे और कार्डबोर्ड/फ़ाइल में 24 घंटे तक, स्टेनलेस स्टील पर 2-4 दिन, प्लास्टिक पर 3 दिन, जूते/चप्पल में 5 दिन और संक्रमित जलाशय में कोई सप्ताह तक ठहरता है.
  

इन्हें है सबसे ज्यदा जोखिम :


कोविड-19 का जोखिम सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को है. बीमार लोगों में भी वे लोग शामिल हैं, जो फेफड़ों की बीमारी, मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, कैंसर, गुर्दा, लिवर आदि रोग से ग्रसित हैं. इसके अलावा कमजोर इम्युनिटी वाले लोग जैसे कुपोषण, फ़ास्टफ़ूड का सेवन, अस्वस्थ जीवन शैली, व्यायाम या योग न करना, तनाव/अवसाद से ग्रसित लोगों को इसके संक्रमण का खतरा अधिक होता है. जो लोग कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं या लैब अथवा अन्य तरीकों से कोरोना योद्धा की भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें भी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है.

उपचार है वैक्सीन : coronavirus treatment, coronavirus treatment update, coronavirus vaccine latest update, coronavirus vaccine news, coronavirus vaccine news india, coronavirus vaccine news india in hindi


अभी तक कोविड-19 का कोई उपचार नहीं है और न ही इसकी वैक्सीन बनी है. यह एक वायरस संक्रमण है, इसलिए लगभग 90 प्रतिशत लोग कुछ दिनों में स्वतः ही ठीक हो जाते हैं. परन्तु जब गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो संक्रमित को अस्पताल या आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है. अभी तक इसमें जो दवाएं इस्तेमाल की जा रही हैं, उनमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, एजिथ्रोमाइसीन, डॉक्सीसाइक्लिन, मेक्टिन, डेक्सामेथासोन, ओसेल्टमीटर, रेमडेसिवीर, फेवीपिरवीर आदि हैं. भारत सहित कई देश इसकी वैक्सीन बनाने में प्रयासरत हैं. 

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

coronavirus update india II अनलॉक- में खुद को बचाते हुए बढ़ना है आगे II how does coronavirus spread II how long does coronavirus last on paper

Manoj kumar

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अनलॉक-1 में जनता को काफी छूटे दी गई हैं, लेकिन कोरोना के संक्रमण का खतरा भी बरकरार है. इससे बचने के लिए शारीरिक दूरी पौष्टिक आहार और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है. अगर हम बचाव के सामान्य उपायों को गंभीरता से लें तो निश्चित ही संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे.......

corona virus

                       कोरोना वायरस



कोविड-19 के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अनलाक-1 लागू होने के बाद से यह खतरा बढ़ गया है. ऐसे में संक्रमण को लेकर तनाव में आने से बचे. इस वक्त सरकार व समाज को मिलाकर ही काम करना होगा. इस महामारी की रोकथाम के लिए विज्ञान के नियमों को मानना जरूरी है और कोरोना से बचाव के लिए भीड़ से दुरी ही सबसे अहम टानिक है.

मास्क बना जीवन का अहम हिस्सा :


बाहर निकलते समय अपना ख्याल रखना जरुरी है. तब तक कोरोना का संक्रमण बरकरार रहेगा, तब तक मास्क (mask) को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर रखना होगा. आने वाले दिनों में इन्फ्लुएंजा का संक्रमण भी होगा. इसलिए मास्क कोरोना के साथ-साथ इन्फ्लुएंजा से भी बचाए

थूक में कई घंटे तक रहता है वायरस :


हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत एक सामाजिक बुराई है. यहाँ काफी संख्या में लोग पान मसाला, गुटखातंबाकू खाते हैं. जबकि यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसके बिना जीवन नहीं चल सकता. इसका सेवन छोड़कर संक्रमण को कम किया जा सकता है. इससे खुद के साथ-साथ समाज का भी बचाव होगा, क्योंकि थूक में वायरस कई घंटो तक रहता है (how long does coronavirus last). इस वजह से दूसरों को कोरोना का संक्रमण होने का खतरा बना रहता है. धूमपान भी कतई न करें और यदि कोई धूमपान करता है तो उसे भी मना करें. वैसे भी सार्वजनिक स्थान पर धूमपानथूकना गैरकानूनी है और इस पर जुर्माने का प्रावधान है.

जरूरी हो तो ही जाएं बाजरा coronavirus market, coronavirus market impact :


कई लोगों को बाजार में घूमने की आदत होती है. बाजार में भीड़ अधिक होती है और शारीरिक दूरी के नियम का पालन आसान नहीं होता. बहुत जरुरी होने पर ही बाजार जाएँ. अब तो शहरों में बहुत सारी चीजें आनलाइन शापिंग का इस्तेमाल करें. अगर बाजार जाएँ तो शारीरिक दूरी का विशेष ख्याल रखें.

ज्यादा घाटक नहीं है वायरस :


तमाम बचाव के उपायों को अपनाने के बावजूद यदि कोई संक्रमित हो भी जाए तो ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह वायरस बहुत ज्यादा घातक नहीं है. देश में ज्यादातर लोगों में हल्का संक्रमण देखा जा रहा है. हल्का संक्रमण होने पर घबराकर तत्काल अस्पताल जाने से बचें. यदि हल्का संक्रमण है तो पांच से सात दिन में यह बीमारी ठीक हो जाती है. इसलिए खाँसी, जुकाम है तो घर में भी परिवार के अन्य सदस्यों से दूरी बनाकर रह सकते हैं. गले में खराश है तो गुनगुने पानी (hot water)से गरारे करें. इसके अलावा भाप लें. यदि हल्का बुखार है तो उसकी दवा ले सकते हैं. यदि बुखार ज्यादा हो तो अपस्ताल में भर्ती होने की जरूरत है. इस तरीके से ही महामारी से पार पाया जा सकता है.

पौष्टिक आहार है जरूरी (corona immunity food), corona immunity booster foods :


खानपान (food) में दूध (milk), पनीर (paneer) cheese , दाल (dal) सहित अन्य पौष्टिक चीजों का सेवन संतुलित मात्रा में करें. फल व हरी सब्जियों को नियमित रूप से भोजन में शामिल करें. भोजन पौष्टिक और हल्का ही लें और अधिक खाने से बचें. व्यायाम करते रहें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ. इसके अलावा पूरी नींद लें. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहेगी.

दफ्तर से आने के बाद करें स्नान :


दफ्तर से (corona care at home) आने के बाद कई लोगों ने एक अच्छी आदत यह शुरू कर दी है कि जूते घर से बाहर निकालने के बाद सीधे नहाने जाते हैं. इसका पालन सभी लोगों को करना होगा. दफ्तर से घर पहुँचने के बाद अपने कपड़े साफ़ करें और स्नान जरूर करें. घर में कोई बुजुर्ग हो तो उनके पास जाने से बचें.


खुद को रखना होगा ध्यान :


अनलाक-1 में कुछ धार्मिक स्थल (dharmik sthal) (mandir corona cases) भी खुल गए हैं. लगभग ढाई माह से लोग धार्मिक स्थलों पर नहीं जा रहे थे. इस संक्रमण के बीच धार्मिक स्थल पर जाने कोई बहुत जरुरी काम नहीं है. वहाँ होने वाली भीड़ से खतरा हो सकता है. दुनिया में ऐसे कई उदाहरण मिले जब धार्मिक स्थलों पर भीड़ होने के कारण कोरोना का संक्रमण हुआ. इटली में चर्च की भीड़ से सक्रमण का मामला सामने आया था.

दूरी बनाकर रखें :


दफ्तर में भी घर की तरह साफ-सफाई होनी चाहिए. प्रतिदिन दो से तीन बार दफ्तर की सफाई जरुरी है. इसके अलावा, कर्मचारियों के हैण्ड वाश के लिए पूरी व्यवस्था होनी चाहिए कर्मचारी कम से कम दो मीटर की दूरी बनाकर रहें. व्यक्तिगत आदान-प्रदान कम होना चाहिए और एक-दूसरे से खाने का सामान कम ही साझा करना चाहिए.

तो न करें सफर (distance coronavirus can travel) :


यदि खाँसी, जुकामहल्का बुखार हो तो दफ्तर न जाएं. खाँसी जुकाम होने पर सार्वजनिक वाहनों में सफर भी न करें, क्योंकि इससे दूसरों को संक्रमण हो सकता है. सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय मास्क पहनकर रहें. कैब में चालक को भी मास्क पहनकर रहना जरूरी है. बचाव क ए लिए बस, रेलवे स्टेशन व सभी दफ्तरों में थर्मल स्कैनिंग की सुविधा जरुरी है.