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सोमवार, 6 जुलाई 2020

प्राणायाम है सबसे लाभकारी

Manoj kumar

प्राणायाम है सबसे लाभकारी

सांस से जुड़े व्यायाम योग के न सिर्फ सबसे आसान व्यायाम हैं, बल्कि इम्यूनिटी को बढ़ावा देने और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सबसे प्रभावी भी. प्राणायाम के लिए आप पालथी बनाकर बैठें. दोनों हाथों को घुटने पर सीधा रखें और लंबी और गहरी सांसें लें. साँस लेते वक्त रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और सांस छोड़ते वक्त ढीला छोड़े. इस प्रक्रिया को कम-से-कम दस बार दोहराएं. आप साँस से जुड़े अन्य व्यायाम जैसे भ्रमरी, भस्त्रिका और कपालभांति भी कर सकती हैं. नियमित रूप से ओम का उच्चारण करने से भी लाभ महसूस होगा.

मत्य्सासन का चमत्कार :

यह पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला योगासन है.यह गले और थाइराइड के लिए बहुत अच्छा है. इससे पेट की चर्बी कम होती है और कमर के दर्द में भी राहत मिलती है. यह आसन शरीर को दिताक्सिफाई करके ऊर्जा के स्तर को बढाता है. पद्मासन में बैठें. धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और पूरी तरह से पीठ के बल लेट जाएं. बाएँ पाँव को दाएं हाथ से और दाएं पाँव को बाएँ हाथ से पकड़े. कोहनियों को जमीन पर टीका रहने दें. घुटने जमीन से सटे होने चाहिए. अब साँस लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर ले जाएँ. धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें. हर दिन इसे चार से पाँच चक्र करें.

प्रभावकारी है भुजंगासन :

भुजंगासन करने के लिए पेट के बल लेट जाएं. हाथों को सिर के दोनों तरफ रखें और माथे को जमीन से टीकाएँ. इस दौरान अपने पैरों को तना हुआ और  इनके बीच थोड़ी दूरी रखें. अब अपनी हथेलियों को अपने कन्धों के बराबर में लाएं. फिर लंबी गहरी साँस भरते हुए हाथों से जमीन की ओर दबाव डालते हुए, नाभि तक शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करें. इस पोजीशन में रहकर आसमान की ओर देखने की कोशिश करें और इस पोजीशन में कुछ देर ठहरें. इस दौरान अपने शरीर का भार दोनों हाथों पर बराबर बनाएं रखें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें. अब धीरे-धीरे साँस को छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं.

पूरे शरीर का व्यायाम :

शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने के लिए और शरीर को मजबूत बनाने के लिए साँस से जुड़े आसन, कंधे से जुड़े आसन छाती से जुड़े आसन यानी प्राणायाम और कमर से जुड़े आसन नियमित रूप से करने जरूरी हैं. जिसमें ताड़ासन, कटि चक्रासन, वज्रासन, मत्स्यासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, धनुरासन आदि शामिल हैं. शुरुआत में सूर्य नमस्कार और प्राणायाम ही नियमित रूप से करें. शुरुआत दो चक्र से करें.

ध्यान देने योग्य बातें :

फायदों के लिए नियमित और लंबे समय तक योग करना होगा.
किसी भी आसन को जोर जबर्दस्ती या ताकत से नहीं करें
सभी आसनों को करते वक्त आपकी साँस की गति सामान्य रहे. विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.  

रविवार, 21 जून 2020

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष चकित कर रहे हैं छोटे-छोटे बालक-बालिका के योगासन और फायदे

Manoj kumar

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष चकित कर रहे 

हैं छोटे-छोटे बालक-बालिका के योगासन

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष चकित कर रहे हैं छोटे-छोटे बालक-बालिका के योगासन और फायदे, inter national yoga day
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 June

लॉकडाउन के बीच बच्चों ने बहुत कुछ सीखा है. उन्हें अपनी सेहत का ध्यान भी रखना आ गया है. इसका नमूना उनका घर में रहकर योग व मेडिटेशन करना है. इससे न सिर्फ उनके तन-मन को नई स्फूर्ति मिल रही है, बल्कि जीवन में अनुशासन भी आया है. यही नहीं कुछ तो शोसल मिडिया पर दूसरों को भी योग सीखा रहे हैं. इन बाल योगियों से जनते हैं कि आखिर कितना फायदेमन्द है योग.....

एक ‘सूर्य नमस्कार’ अनगिनत शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ :  

योग शुरू करने को लेकर लोगों में अक्सर इस बात की चिंता रहती है कि उनके लिए कौन से आसन सही रहेंगे, उन्हें करने का सही तरीका क्या है, युग गुरु या किसी योगा एक्सपर्ट्स से कैसे मिला, जाए वगैरह-वगैरह बातें मन में सोचने लगते हैं. ऐसे सूर्य नमस्कार इन सभी सवालों के जवाब देता हैं. 12 आसनों से मिलकर बनी यह एक योग क्रिया पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काफी है. यही वजह है कि इसे संपूर्ण योग भी कहा जाता है.

हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों पहले योग के महत्व को समझा और इसे जीवन का आधार बनाया. माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेद्र मोदी ने योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई. कोरोना से लड़ाई में योग के महत्व हो आज पूरा विश्व मान रहा है.

किसी ने सच ही कहा है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. कमाल कोई भी दिखा, सकता है. साल 2019 के जुलाई महीने की सात तारीख थीं. जयपुर के जलमहल में एक अनोखा विश्व रिकार्ड बना. गाजियाबाद के सातवीं कक्षा के स्टूडेंट वरुण शर्मा ने एक घंटे 30 मिनट तक पश्चिमोत्तान आसन करके यह कीर्तिमान बनाया. वे सिर्फ यहीं नहीं रुके, बल्कि उसी वर्ष इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स एवं गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में भअपना नाम दर्ज कराया. इसके अलावा, मेरठ में आयोजित राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया. इन सब उपलब्धियों के लिए वरुण को योग रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया. आखिरकार छोटी उम्र में इतना सब करने की प्रेरणा कैसे मिली, पूछने पर वे बताते हैं, ‘मैंने अपने गुरु एवं माता पिता से बहुत कुछ सीखा है. भैया तेजस्वी शर्मा मेरी प्रेरणा रहे हैं. दूसरी कक्षा में था, तब से योग का अभ्यास कर रहा हूँ.इससे न सिर्फ मेरी एकाग्रता बढ़ी बल्कि पाजिटिव रहकर सारे काम, पढाई आदि कर पाता हूँ. जंक फ़ूड नहीं लेता. पौष्टिक भोजन करता हूँ, तो इम्युनिटी भी ठीक रहती है.’ अब आठवीं कक्षा में पढ़ रहे वरुण की मानें, तो हर बच्चे को योग जरूर करना चाहिए.

बड़ा पद्मासन कर बनाया रिकार्ड :

11 वीं की स्टूडेंट निशा शर्मा को भी योग से लगाव है. इससे इनके शरीर में इतना लचीलापन आ गाय है कि वे कठिन से कठिन आसनों को सरलता से कर लेती है. इनके मानें, तो अभ्यास करने से कुछ भी असंभव नहीं लगता है. मन हल्का रहता है. निशा एक घंटे 50 मिनट में बड़ा पद्मासन लगाकर गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम भी दर्ज करा चुकी है. इसके अलावा, उन्होंने 1019 के जून महीने में दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योगासन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था. साथ ही, स्टेट लेवल चैम्पियन में भी ब्रांज मेडल हासिल किया है. स्क्रीन पर ज्यादातर वक्त बीतने वाले बच्चों-किशोरों को नसीहत देते हुए वे कहती हैं, ‘हमें अपना ख़याल खुद रखना चाहिए. आँखों पर जोर देने से अच्छा है कि हम योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. इससे न सिर्फ हमारी बाडी में फ्लेक्सिबिलिटी आती है, बल्कि हम एलर्ट भी रहते हैं. मन भी खुश रहता है.

योग बढ़ा रहा आत्मविश्वास:

नौवीं कक्षा की स्टूडेंट वास्तिक आर्या ने छुट्टियों में जब योग सीखा, तो उन्हें इतना अच्छा लगा कि बाद में उन्होंने बाकायदा योग को क्लासेज ज्वाइन कर लीं. अब वे सुबह-शाम नियमित रूप से योगाभ्यास करती हैं. वास्तविक बताती हैं, ‘मेरे अदंर के आत्मविश्वास आया है कि मैं कुछ भी कर सकती हूँ. चीजों पर फोकस बढ़ा है. बाडी में फ्लेक्सिबिलिटी और लाइफ में अनुशासन आया है.’ इन दिनों जब अधिकतर किशोर व बच्चे मोबाईल गेम खेलने या टीवी देखने में समय बिता रहे हैं, वस्तिका अपनी माँ के साथ योग की online क्लासेज भी लेती हैं. नि:संदेह योग ने बच्चों-किशोरों के जीवन में भी नई ऊर्जा का संचार किया है. वे जान गए हैं कि इससे उनके तन मन को कितना फायदा होता है. अच्छी बात यह है कि आयुष मंत्रालय, योग स्पोर्ट्स एसोसिएशन एवं फिजिकल एजुकेशन फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया जैसे संस्थान स्कूली स्तर पर बच्चों को योग के प्रति जागरूक कर रहे हैं.

शनिवार, 20 जून 2020

जीवन का मंत्र संगीत और योग है और इनसे क्या-क्या फायदे हैं, तो इसके विषय में जानते हैं

Manoj kumar


जीवन का मंत्र संगीत और योग है 


21 जून का दिन खास है, क्योंकि दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और विश्व संगीत दिवस, दोनों मनाए जाते हैं. दोनों विधाएँ मिलकर न सिर्फ मानसिक शान्ति और संबल प्रदान करती हैं, बल्कि कोरोना को हराने के लिए जरूरी रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं. संगीत जगत से जुड़े कलाकार मानते हैं कि योग और संगीत हैं एक-दूसरे के पूरक है........
वन का मंत्र संगीत और योग है और इनसे क्या-क्या फायदे हैं, तो इसके विषय में जानते हैं, yoga and music
योग और संगीत 

विभिन्न शोध अध्ययन में कहा गया है कि संगीत सुनने या गुनगुनाने से आपकी मानसिक स्थिति बेहतर होती है, जबकि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी हैं. संगीत और योग के मेल पर भजन गायक अनूप जलोटा का कहना है कि कमजोर इन्सान गाना नहीं गा सकता है. इसके लिए स्वस्थ शरीर के साथ सांसों का साथ देना भी जरूरी है. योग के कुछ आसन आपकी सांसों को मजूबत बनाते हैं. मैं कितना ही व्यस्त क्यों न रहूँ, रोजाना एक से डेढ़ घंटे योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन करता हूँ. ये मेरी संगीत साधना का अहम हिस्सा हैं.

मिलकर बनाएँगे पृथ्वी सुरक्षित :

संगीत और योग का मेल संतुलित मस्तिष्क औरजीवन के लिए जरूरी है. योग संगीत जगत से जुड़े हुए लोगों की जिन्दगी का अहम हिस्सा है. गायक कैलाश खेर का कहना है कि संगीत और योग ही हैं, जो पृथ्वी को बचाएंगे. दवाओं से तो शारीरिक रोग दूर होते हैं, लेकिन मानसिक रोग तो योग से ही दूर होंगे. कोरोना संकट में उपजे तनाव से दूरी बनाए रखने में संगीत एक मजबूत सहारा रहा है. सुख की घड़ी हो या दुःख की, संगीत हमारे जीवन का पूरक रहा है, पुराने गानों में समर्पण दिखता था, जैसे कोई आराधना हो रही हो. प्रेम को हल्के में नहीं लिया जाता था. मेरे गानों में अध्यात्म ही झलक है. आध्यात्मिक संगीत थेरेपी की तरह होता है. आप उसमें रम जाते हैं. संगीत और योग आपके तनाव को दूर कर देता है. मेरे घर में योग का माहौल है. 

सांमजस्य से होती साधना पूरी :

गौर करें तो योग और संगीत दोनों के लिए माहौल भी कमोबेश एकसमान होता है. इस संबंध में गायिका शिल्पा राव कहती हैं कि संगीत हो या योग, दोनों सी साधना हैं. उन्हें आपको एकाग्रचित होकर करना होता है. दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमन्द हैं और आपको प्रसन्न रखते हैं. ये आपमें ऊर्जा का संचार करते हैं. आपके बिगड़े मूड को भी बना देते हैं. संगीत में स्वरों की श्द्धता पर जोर दिया जाता है, वहीँ योग में आसन और मुद्राओं पर ध्यान केन्द्रित रहता है. दोनों में ही स्वर व मुद्रा की श्रेष्ठता से आनन्द और स्वास्थ्य पाया जा सकता है. इस दृष्टि से दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. संगीत में एक ही स्थान पर साधना करने के लिए शरीर, मन व मस्तिष्क पूर्ण स्वस्थ होना चाहिए. उसमें योग अहम भूमिका निभा सकता है.

योग और संगीत कला है:

गायक जुबिन नौटियाल का मानना है कि योग और संगीत दोनों ही कला से जुड़े हैं. योग में आपको अपना मस्तिष्क एक जगह पर केद्रित करना होता है, ठीक उसी तरह जैसे संगीत बनाते वक्त आपको अपना सौ प्रतिशत ध्यान लगाना होता है. योग और संगीत एक साथ चलते हैं. दोनों ही संतुलित जीवन और मस्तिष्क के लिए बहुत काम आते हैं.

तन मन की शुद्धता का स्रोत :

संगीत की बात हो और उसमें भक्ति रस का जिक्र न आए, ऐसा तो संभव ही नहीं. भक्ति आधारित संगीत भले ही फिल्मों में कम दिखता है, लेकिन इसके प्रति लगाव कभी कम नहीं होता. अनूप जलोटा कहते हैं कि फिल्म में भजन हो या न हो, भक्ति संगीत अमर रहेगा. लोग भजन से कभी दूर नहीं होते. जिस तरह से योग आपके तनाव को दूर करता है उसी तरह ईश्वर की भक्ति में लीन होने पर आप अपने सारे तनावों और दुखों को भूल जाते हैं. यह संगीत का चमत्कार होता है. दरअसल, योग और संगीत के खूबसूरत सामंजस्य का उद्देश्य तन के साथ मन की शुद्धता को हासिल करना है.स्वरों की उपासना, रियाज,शास्त्र सम्मत पद्धति द्वारा नाद ब्रह्म की आराधना कर अंतर्मन में गहराई तक उतारना संगीत का मुख्याल लक्ष्य है. संगीत शास्त्र व अध्यात्म जड़े हुए हैं,क्योंकि दोनों का उद्देश्य एकसमान है. दोनों में आत्म साक्षात्कार होता है.

संगीत को सुनते हुए करें योग :

वेस्ट वर्जीनिया यूनिर्वसिटी के स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर किम इन्स ने अपने शोध अध्ययन में वैज्ञानिक तरीके से तस्दीक की है कि जब बात संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की हो तो मेडिटेशन और म्यूजिक दोनों समान रूप से कारगर हैं. संगीत ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल के स्तर को कम करता है,वहीँ योगासन के अंतर्गत ध्यान और प्रणायाम के जरिए तनाव, ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, दिल की जिसकी वजह से मन प्रसन्न और शारीरिक निरोगी रहता है. संगीत सुनते हुए ध्यान और योग करने का विचार बेहतरीन है.

गुरुवार, 18 जून 2020

योग से जोड़ें प्रतिरोधक क्षमता के तार II क्या आप जानते हैं इससे क्या-क्या फायदे हैं

Manoj kumar

योग से जोड़ें प्रतिरोधक क्षमता के तार

कोरोना सक्रमण से बचाने के लिए संयमित जीवनशैली के साथ ही योग भी महत्वपूर्ण माना गया है. प्रख्यात योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार सात्विक जीवन पद्धति व योग के संयोग से हम ऐसी तमाम चुनौतियों से निपटने की ऊर्जा हासिल कर सकते हैं………
योग से जोड़ें प्रतिरोधक क्षमता के तार, immunity power ofyoga
योग आसन से लाभ

दुनिया को भारत का तोहफा है योग. आज जब वैश्विक महामारी के रूप में कोरोना संक्रमण अपना आतंक मचाए हुए है तो ऐसे में योग एक बार फिर मददगार साबित हुआ. हर किसी ने माना कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता ही सबसे महत्वपूर्ण है. वहीँ चहुओर फैले भयाक्रांत माहौल में भी मानसिक तौर पर मजबूत रहने की बात हो रही है. शारीरिक व मानसिक, दोनों ही प्रकार की मजबूती हासिल करने में योग और प्राणायाम की भूमिका हर कोई स्वीकार रहा है. योग व सात्विक जीवन पद्धति अपनाकर ही हम इन चुनौतियों से निपटने की ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर सकते हैं.

योग से करें दिन शूरू :

रक्तचाप, तनाव, मधुमेह, हृदय रोग जैसे जीवन शैली आधारित बीमारियों से लगभग हर कोई परेशान है. उस पर चिंताजनक बात यह रही कि कोरोना वायरस का संक्रमण उन लोगों के लिए गंभीर ख़तरा है, जो उपरोक्त में से किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं. ऐसे में प्राणायाम और आसनों के जरिए इन सभी तकलीफों से बचा जा सकता है. अच्छी बात यह है कि इन क्रियाओं को रोकने में समय भी अधिक नहीं लगता. आप चाहे कितने भी व्यस्त रहें लेकिन दिनचर्या में से रोज सुबह शान्त, शीतल और स्वच्छ वायु वाले वातावरण में कम से कम दस मिनट का समय तो निकाल ही सकते हैं. यह न सिर्फ कोरोना  संक्रमण, बल्कि अन्य रोगों के प्रभाव से भी मुक्ति दिला देगा. इसमें प्राणायाम सबसे अधिक लाभकारी है. नियमित योगासन करने से शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की वृद्धि होती है. इन्हीं की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

मानसिक सबलता में सहायक :

कोरोना काल में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आत्मबल की मजबूती भी बेहद जरुरी है. ऐसे में मानसिक शान्ति के लिहाज से ध्यान और प्राणायाम अत्यधिक महत्वपूर्ण साबित होते हैं. इससे हमें चार प्रकार का बल यानी शारीरिक बल, मनोबल, प्राणबल और आत्मबल मिलता है. ये चारों बल जब शरीर में बेहतर तरीके से विकसित होते हैं तो इसी को इम्युनिटी कहते हैं.

खानपान का अहम योगदान :

शारीरिक व मानसिक क्षमता के साथ ही भोजन का भी बड़ा महत्व होता है. भोजन हमेशा शुद्ध, सात्विक और ताजा लेना ही श्रेयस्कर रहता है. जितना हो सके, मांसाहार से परहेज करें. आयुर्वेद में भी शाकाहार के कई लाभ बताएं गए हैं. मौसम के हिसाब से आहार का चुनाव करें. इसके अलावा तुलसी, गिलोय और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर दिन में तीन से चार बार लेना चाहिए. इससे शरीर की इम्युनिटी मजबूत होती है.

5 प्राणायाम देंगे मजबूती :

पाँच तरह के प्राणायाम से हम शरीर के हर भाग को मजबूत बना सकते हैं. ये पाँच प्राणायाम हैं जैसे : भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उज्जायी. नियमित रूप से इनका अभ्यास करने से हम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं. इनके अलावा सूर्य नमस्कार व ध्यान भी बेहद प्रभावशाली हैं. सूर्य नमस्कार जहाँ हमारे शरीर, इन्द्रियों, विचारों और भावनाओं में संवेदना का संचार करता है, वहीं ध्यान हमारी आत्मशक्ति बढ़ाकर तनाव दूर करता है.
Ø भस्त्रिका : पाचन तंत्र, हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के साथ ही पित्त और कफ को भी संतुलित रखता है. 
Ø कपालभाति : शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखने में सहायक है. 
Ø अनुलोमविलोम : हृदय रोगियों के लिए विशेष तौर पर फायदेमंद होता है. 
Ø भ्रामरी : तनाव से मुक्त रखने में सहायक होता है. 
Ø उज्जायी : माइग्रेन और अवसाद से निजात दिलाता है.
 

5 तरह के विशेष आसन :

ü पवनमुक्तासन : वायु विकास और कब्ज को दूर करने में बेहद प्रभावी होता है. 
ü उष्ट्रासन : पाचन तंत्र, अमाशय और आंतों में खिंचाव पैदा करता है. इससे जठराग्नि प्रदीप्त होकर भूख बढ़ाती है. कमर दर्द के रोगी भी इसे आसानी कर सकते हैं. 
ü पाश्चिमोत्तानासन : यकृत (लीवर), आगनाश्य और अधिवृक्क ग्रंथियों सहित पूरे उदर व श्रोणी प्रदेश को पुष्ट बनाता है. 
ü मुंडूकासन : पैंक्रियाज से इन्सुलिन रिलीज करने में सहायता देता है. इम्युनिटी बढ़ाता है. मधुमेह, कोलाइटिस जैसी तकलीफों में फायदेमंद होता है. 
ü उत्तानपादासन : हाजमें को दूरुस्त रखने के साथ ही तंत्रिका तंत्र को भी मजबूत बनाता है.


मंगलवार, 2 जून 2020

6 प्राणायाम योगासन से अलग-अलग फायदे I ये 50 फायदे रोजाना प्राणायाम करने से होते हैं..

Manoj kumar

प्राणायाम योगासन से मजबूत करें फेफड़े और बढाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता

6 प्राणायाम योगासन से अलग-अलग फायदे, pranayam ke laabh
ये 50 फायदे रोजाना प्राणायाम करने से होते हैं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिये एक बार फिर देश को संबोधित किया है. इस दौरान उन्होंने कोरोना से लड़ने में प्राणायाम और योग के फायदे गिनाए. उन्होंने कहा कि ये वायरस हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन प्रणाली) को प्रभावित करता है. ऐसे में हमें इस रोग से बचने के लिए परंपरागत तरीके की ओर लौटना चाहिए. जिनमें सबसे आसान और सबसे कारगर तरीका प्राणायाम है. प्राणायाम हमारे फेफड़ों को मजबूत करने के साथ ही रोगों से लड़ने की क्षमता को भी विकसित करता है. हम आपको बता रहें प्राणायाम और उन्हें कैसे किया जाए :-

कपाल भांति :

कपालभाति में कमर सीधी रखें और सिद्धासन में बैठककर दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखें. श्वांस को नाक से तेजी से बाहर छोड़ें व पेट को अंदर की ओर खींचे. ध्यान रखें की श्वांस लेनी नहीं है, सिर्फ छोडनी है. इससे श्वांस स्वतः ही अंदर चली जाएगी.

लाभ : शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है. अस्थमा, वजन कम करने; कब्ज, एसिडिटी, पेट संबंधी रोग दूर होते हैं. इम्युनिटी बढाता है और श्वसन मार्ग को साफ करता है. मस्तिष्क को सक्रिय करने में मदद करता है.

भस्त्रिका :

इस शब्द का शाब्दिक अर्थ धौंकिनी है. धौंकिनी की तरह आवाज करते हुए शुद्ध वायु को अंदर लिया जाता है और अशुद्ध वायु को फेंका जाता है. सिद्धासन में बैठकर गर्दन और रीढ़ को सीधा रखें. तेजगति से स्वांस लें और छोड़ें. ध्यान रखें कि स्वांस लेते समय पेट फूलना चाहिए और श्वांस छोड़ते समय पेट सिकुड़ना चाहिए.

लाभ : फेफड़ो की कार्यक्षमता को बढाता है. व्रत, पित्त, काफ के दोषों को दूर करता है. मोटापा, दमा और स्वांस रोग दूर होते हैं. स्नान रोगों में भी लाभकारी है.

उज्जायी प्राणायाम :

सुखासन में बैठकर मुँह को बन्द कर नाक के छिद्रों से वायु को फेफड़ों में भरने तक साँस खींचे. कुछ देर वायु को अंदर ही रखें और फिर नाक के दाएं छिद्र को बन्द कर वायु को धीरे-धीरे बाहर निकालें. ध्यान रखें कि वायु को अंदर और बाहर खींचते समय खर्राटे की आवाज आए.

लाभ : श्वांस नलिका, थायराइड, स्वर तंत्र को संतुलित करता है. कई बीमारियों से बचाता है.

भ्रामरी :

सुविधाजनक आसन में बैठकर आँखें बंद कर शरीर को शिथिल करें. कानों को अंगूठे से बन्द करें और चारों अँगुलियों को सिर पर रखें लंबी और गहरी स्वांस लें और फिर श्वांस को मधुमक्खी के गुंजन जैसी आवाज करते हुए साँस बाहर निकालें.

लाभ : भय, अनिद्रा, चिंता, गुस्सा और मानसिक विकारों में लाभकारी है. साइसन के रोगियों के लिएफायदेमंद.

अनुलोम विलोम :

सिद्धासन में बैठकर दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने क बन्द करें और बाएँ से स्वांस लें. पाँच तक गिनती करें और फिर बाएँ नथुने को बन्द करें और दाएं नथुने से पांच की गिनती करते हुए आहिस्ता से श्वांस छोड़ें. अब यही क्रम बाएँ हाथ और बाएँ नथुने से दोहराएँ. इस तरह से अनुलोम विलोम प्राणायाम का एक चक्र पूरा होता है.

लाभ: नाड़ियों को शुद्ध करता है. तनाव, अवसाद कम करता है. एकाग्रता में सुधीर और रक्त परिसंचरण को ठीक करता है.

शीतली :

आरामदायक स्थिति में बैठकर के जीभ को मोड़कर के नली का आकारदें और मुँह केबाहर निकलकर श्वांस को पूरी क्षमता से अंदर लें.

लाभ : रक्तचाप कम करता है. पित्त दोष, डिप्रेशन को दूर करता है. गर्मी से निजात दिलाता है. मानसिक शान्ति प्रदान करता है.