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सोमवार, 27 जुलाई 2020

सुखी लाल मिर्च II लाल मिर्च खाने के फायदे II lal mirch II lal mirch powder benefits II lal mirch powder ke fayde II lal mirch powder in hindi II red chilli powder in hindi II red chilli in hindi II dry red chilli in hindi

Manoj kumar

सुखी लाल मिर्च II लाल मिर्च खाने के फायदे II lal mirch II lal mirch powder benefits II lal mirch powder ke fayde II lal mirch powder in hindi II red chilli powder in hindi II red chilli in hindi II dry red chilli in hindi


देश विदेश के भोजन व्यंजनों के साथ मिलकर उनका स्वाद चटख बनाने में खूब योगदान देती रही है खूबसूरत रंगत और तेज झार वाली लाल मिर्च.......

लाल मिर्च


लाल छड़ी मैदान खड़ी :-


नई दुनिया से पहुंची नवेली लाल मिर्च ने बहुत जल्दी मसालों की दुनिया की शाहजादी काली (सियाह) मिर्च को भीतर रसोई से बेदखल  कर दिया. आज इसके मायके मैक्सिको के खान-पान से कहीं अधिक करीबी नाता भारतीय भोजन के साथ जुड़ चुका है. भारतीय उपमहाद्वीप के के लगभग हर प्रान्त तक यह पहुंच चुकी है और कई ‘स्थानीय’ प्रजातियाँ स्वदेशी संतानें बन चुकी हैं.


किस्में है कई तरह के :


राजस्थान की सुर्ख नागौरी, जोधपुर की राजसी मैथानी इस इलाके के मुँह को झुलसा देने वाले ‘लाल मांस’ के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी है. यहीं हरी मोटी और नाम मात्र की तीखी मिर्चों से दर्जन प्रकार के मिर्ची बड़ा बनाए जाते हैं जिनके पेट में मसालेदार आलू की पीठी भरकर बाहर बेसन की हल्की परत चढ़ाकर तला जाता है. महाराष्ट्र में कोल्ह्पुर की ‘संकलेश्वरी’ मिर्च मशहूर है जो ‘लाल रस्से’ में जान डालती है. जिसका ताप कम करने के लिए मुँह में तत्काल ‘सोलकड़ी’ डालने की जरूरत पड़ती है. ‘लंका’ नाम की छोटी गोलाकार पर बेहद तीखी मिर्च का साम्राज्य बंगाल में फैला है. इसे अंग्रेजी में ‘बोर्ड चिली, कहते हैं और यह थाईलैंड तथा वियतनाम में भी बहुत लोकप्रिय है. भारत के पूर्वोत्तरी राज्यों में पैदा होती है. ‘भूत झोलिया’ जिसके अन्य नाम नागा मिर्ची और राजा मिर्ची है. सीए संसार की सबसे तीखी मिर्च माना जाता है मैक्सिको को ‘जलापैनो’ से कहीं अधिक तेज. नेपाली इसे ‘डल्ला’ पुकारते हैं. कुछ विद्वानों का मानना है कि यह पुर्तगालियों के आने के पहले से यहाँ विद्दमान थी. यह सुझाना तर्कसंगत लगता है क्योंकि भूटान के दुर्गम इलाके में ‘एमा दात्सी, नामक व्यंजन बनाया जाता है जिसमें सिर्फ याक दे दूध का पनीर और मिर्च पड़ती हैं. जाहिर है किआम देहाती भोजन दक्षिण अमेरिका की आयात पर निर्भर नहीं हो सकता था.


हर डिश बन जाए हिट :


सबसे कम तीखी और रंग के लिए जानी जाने वाली लाल मिर्च कश्मीरी मिर्च हा जो गोलाकार भी होती है और लंबी भी. कश्मीरी वाजवान में ‘मर्त्वांगन कोरमा’ का ख़ास स्थान है जिसके नाम से ही यह संकेत मिल जाता है कि इसमें मांस की जुगलबंदी मिर्च के साथ साधी जाती है. ‘रोगन जोश’ और कोफ्ते जैसे कई अन्य व्यंजनों में भी इसका इस्तेमाल होता है. मध्य प्रदेश की सैलाना रियासत के शाही मेनू में ‘हरी मिर्च  का कीमा’ नायाब समझा जाता है. अवध के नफासतपसंद बावर्ची अपने कौशल का प्रदर्शन करने के लिए लाल नहीं पीली मिर्च का इस्तेमाल करना पसंद करते रहे हैं. यह मिर्च हरी को लाल होने तक सुखाए जाने के पहले ही बटोर ली जाती है. उत्तराखण्ड में पैदा होने वाली मिर्चें मौसम के कारण सुर्खी पकड़ ही नहीं पातीं.

हर थाली की शोभा :


आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘गुंटूर’ और रसमपत्ती तो कर्नाटक में ‘बडगी’ नामक लाल मिर्च को उत्तम समझा जाता है. तमिलनाडु में दही में भिगोकर सुखाई गई मिर्च मद्रासी पत्तल की शोभा बढ़ाती है. दक्षिण के भोजन में लाल मिर्च का इस्तेमाल खुले हाथ से होता है. आन्ध्र प्रदेश का ‘पोडी मसाला’ विदेशों में ‘गनपाउडर’ यानी बारूद के नाम से पहचाना जाता है. इसे गीले भात के साथ थोड़ा सा नमक तथा तेल की कुछ बूंदे मिलाकर भरपेट खया जा सकता है. वास्तव में महाराष्ट्र के खानादेश वाले इलाके में लहसुन-लाल मिर्च का थेचा हो या उत्तर भारत में लाल मिर्च-प्याज की चटनी यही गरीबपरवर भूमिका अदा करते रहे हैं. साधन सपन्न ही नहीं वंचित वर्ग भी हरी और लाल मिर्च के अचार के साथ रूखी या चुपड़ी रोटी के निवालों का आनंद ले सकता है. हरी मिर्च का सरसों वाला तथा लाल मिर्च का भरवाँ गोरखपुरी-बनारसी अचार तो विश्वविख्यात है.

बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि जिस पैकेटबंद लाल मिर्च के पाउडर का हम रोज इस्तेमाल करते हैं वह कई प्रकार की लाल मिर्च का मिश्रण होता है जिसमें विभिन्न प्रजातियों को तीखेपन, रंग और स्वाद के लिए संतुलित मात्रा में मिलाया जाता है-कुछ वैसे ही जैसे चाय की पत्तियों और कॉफ़ी की बीजों को. 17 वीं.-18वीं सदी के दखनी भक्त कवि पुरंदरदास ने ‘पल-पल रंग बदलती कभी हरी, पिली और फिर लाल मिर्ची, की प्रशंसा में एक स्तुति गान रचा है जहाँ कहा गया है कि ‘यह गरीबों की वफादार मित्र है, स्वाद में लुभाने वाली पर ऐसी तीखी की कुछ पल के लिए विट्ठल का भजन तक भुला देती है. मिर्च के महिमामंडन के लिए हमें हिन्दी फ़िल्मी गानों - ‘लाल छड़ी मैदान खड़ी या हाय मिर्ची. हाय हम मिर्ची.’ सरीखे- से यह रचना खाई अधिक सार्थक लगती है.

रविवार, 5 जुलाई 2020

जब आपके पास न हो सेनीटाइजर II sanitizer

Manoj kumar

जब आपके पास न हो सेनीटाइजर

पूरी दुनिया में खलबली मचाने वाले कोरोना वायरस (कोविड19) के संक्रमण से बेचने के प्रारंभिक उपाय के तौर पर सेनिटाइजर का प्रयोग तेजी से बढ़ा है. हर व्यक्ति के लिए महंगा सेनिटाइजर खरीदना अथवा इसकी उपलब्धा सहज नहीं है, पर इसका मतलब यह कतई नहीं कि आपको अपनी सेहत से समझौता करना पड़ेगा.
sanitizer


स्प्रिट :

इसका प्रयोग सेनिटाइजर के रूप में कर सकते हैं. चिकित्सा इसका प्रयोग इंजेक्शन लगाने के पहले स्किन साफ करने में करते हैं और यह संक्रमण से बचाता है. यह मेडिकल स्टोर से बचाता है. यह मेडिकल स्टोर पर सहजता से उपब्ध रहता है. 

एथिल एल्कोहल:

यह एक बेहतर सेनिटाइजर है. इसमें सिर्फ पाँच प्रतिशत पानी होता है इसलिए इसमें बीस से पच्चीस प्रतिशत अतिरिक्त पानी (उबालकर ठण्डा किया हुआ) मिलाकर साफ शीशी में भर लें. यह संक्रमण से आपको सुरक्षित रखेगा. यह किसी भी वैज्ञानिक स्टोर पर मिल जाता है.

लिक्विड सोप :

साबुन का प्रयोग किसी भी वायरस की ऊपरी परत को तोड़ने में बहुत सक्षम होता है. बस ध्यान रहे कि जब भी हाथ धुलें तो कम से कम चालीस सेकेण्ड तक झाग बनाएं और फिर साफ पानी से धोने के बाद हाथों को साफ कपड़े से पोंछ लें.  

सोमवार, 15 जून 2020

क्यू जरूरी है हाथ धोना II हाथ साफ रखने लाभ क्या है जानते है आप

Manoj kumar

क्यू जरूरी है हाथ धोना

कोरोना वायरस के मामले में हैण्ड वाशिंग को बहुत महत्व दिया जा रहा है. वजह है कि इसका संक्रमण हाथों के जरिए ही सबसे अधिक फैलता है. कुछ लोग पूछते हैं कि बार-बार हाथ धोने से क्या होगा? आइए जानते हैं कि हाथ नहीं धोने से क्या-क्या हो सकता है.......
क्यू जरूरी है हाथ धोना, Hand Wash
Hand Wash


चिकित्सक विज्ञान मानता है कि संक्रामक बीमारी से बचने के लिए हाथ धोने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है. इससे हाथों में लगा संक्रमण निकल जाता है. एक अध्ययन के अनुसार हमारे देश में 40 प्रतिशत लोग खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते हैं. इसी अध्ययन के मुताबिक यदि हाथ धोने की प्रक्रिया पूरी ईमानदारी से निभा लें तो हर साल लाखों लोगों की जान बच सकती है.

एक से दूसरे तक पहुँचते हैं रोगाणु :

बात केवल कोरोना तक ही सीमित नहीं है. हाथ संक्रमित हों और उन्हें धोकर साफ न किया जाए तो कई संक्रमण रोगाणु परिजनों और मित्रों तक पहुँच सकता है. दरवाजे का हैंडल, टायलेट या बाथरूम के दरवाजे का हैंडल, नल की टोंटी, रेलिंग, लिफ्ट के बटन और ऐसे ही अनेक स्थान है, जो आमजन के साथ-साथ आपके इस्तेमाल में भी आते हैं और संक्रमित करते हैं.

पकड़ लेगी गंभीर बीमारी :

रोगाणु संपर्क के जरिए शरीर म आसानी से पहुँच जाते हैं. यदि आपको हाथ पहुंचाने की आदत है तो अनजाने में ही आपके हाथों का संक्रमण मुँह और आँखों को प्रभावित करेगा. इन संक्रमणों की वजह से आप गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं.

ऐसे धोये हाथ :

याद रखें की सेनिटाइजर से अधिक प्रभावशाली होता है साबुन से हाथ धोना. हाथों में साबुन लगाकर देर तक रगड़े, झाग निकलने का इंतजार करें, हथेलियों और पिछले हिस्से सहित अंगुलियों को भी रगड़कर साफ करें. अधिक पानी से पूरा झाग निकालें.

हो सकता है पेट का संक्रमण :

कोरोना वायरस के बाद सबसे अधिक तकलीफदेह है पेट का संक्रमण. यह रोगाणु दूषित पानी एवं संक्रमित हाथों से शरीर में पहुँचते हैं, जिसके कारण टायफाइड और कालरा जैसे घाटक रोगों का संक्रमण पैदा होता है. डारिया के 10 में से 4 मामलों को सही तरीके से हाथ धोकर रोग की चपेट में आने से बचाया जा सकता है.

आँखों के संक्रमण को रखें दूर :

हैण्ड वाशिंग का एक और महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे आँखों को होने वाले संक्रमण से बचाया जा सकता है. संक्रमित हाथों के जरिए ही कंजेक्टिवाइटिस और ट्रेकोमा जैसे आँखों के संक्रामक रोग फैलते हैं. ट्रेकोमा एक ऐसा बैक्टीरियल संक्रमण है, जो दुनिया भर में अंधत्व का कारण हैं.

बचाए त्वचा के सक्रमण से :

स्टेफिलोक्काकस, ऐसा बैक्टीरिया है जो शरीर की त्वचा और नथुनों में पाया जाता है. यदि ये रोगाणु खुले घावों तक पहुँच जाएँ. तो त्वचा का संक्रमण हो जाता है. त्वचा के अंदर सॉफ्ट टिश्यू तक उतरकर ये बैक्टीरिया शरीर के जोड़ों और हड्डियों तक पहुंचता है. हैण्ड वाशिंग से इसका संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है.  

मंगलवार, 9 जून 2020

प्रत्येक रंग का अपना एक अलग खास रंग होता है II रंगों का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है....

Manoj kumar

हर रंग कुछ कहता है

रंगों का हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्स्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है. आइए जानते हैं कौन सा रंग क्या कहता हैं.....
प्रत्येक रंग का अपना एक अलग खास रंग होता है, color
रंग की दुनिया अलग होती है 

नीला रंग :

कलर एक्सपर्ट का कहना है कि नीले रंग में मन को शान्त रखने का चमत्कारिक गुण होता है. यह आँखों को सुकून पहुंचाता है और साथ दिलोदिमाग की बेचैनी कम करने ब्लड प्रेशर को सामान्य रखता है. अगर आपके मन में बेचैनी या घबराहट हो रही हो तो नीले रंग के न्यूट्रल या सॉफ्ट शेड्स पहनें या घर में कलर्स का इस्तेमाल करें. आप इनका सकारात्मक प्रभाव देखकर आश्चर्यचकित रह जाएँगे.

हरा रंग :

कलर एक्सपर्टस का कहना है कि हरा रंग सृष्टि का रंग माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कलर पैलेट के सबसे खूबसूरत रगों में शुमार किया जाता है हरा रंग. हरे रंग के विभिन्न शेड्स जैसे बेज ग्रीन और यलो ग्रीन इस श्रेणी के बेहतरीन रंग हैं. ये तनाव को दूर करने में कारगर भूमिका निभाते हैं साथ ही आँखों को सुकून भी देते हैं.

बैंगनी रंग :

कलर एक्सपर्टस का कहना है कि बैंगिनी रंग ज्ञान, शान्ति, संतुलन व मजबूती का प्रतीक माना जाता है. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शरीर में पोटैशियम और सोडियम की मात्रा को संतुलित करने का काम करता है. यह रंग मन को सुकून देता है.

पीला रंग :

कलर एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीला रंग जोश, ऊर्जा एवं उत्साह का प्रतीक माना जाता है. अगर आप हर समय चुस्ती-फुर्ती चाहती हैं तो अपनी टेबल के करीब थोड़े से पीले फूल रखें. आप कीचन में भी पीले रंग के कुछ फूल सजा सकती हैं. कीचन में पीले रंग के फूल रखने पर यह आपके अधिक एक्टिव रखेगा.

सफेद रंग :

कलर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सफ़ेद रंग से पवित्रता, पारदर्शिता और ताजगी का बोध होता है. यह गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक माना जाता है

शनिवार, 6 जून 2020

केसर की रंगीन कहानी और 20 फायदे II केसर कैसे बनता है

Manoj kumar

केसर की रंगीन कहानी

भारत सरीखे विशाल देश में लगभग हर दिन किसी तीज-त्योहार या मान्यता से मनाया जाता है. होली के ऐसा ही त्योहार है जो भारत सहित कई अन्य देशों में भी बड़े उमंग और उल्लास से मनाया जाता है. यूँ तो होली को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं लेकिन यह बात सुनकर बड़ा रोमांच होता है कि पुराने समय में राजा-महाराजा दुनिया के सबसे महगे मसाले यानी केसर की होली खेलते थे. आज भी केसर सबसे महँगी फसल है इसलिए इसे लाल सोना भी कहा जाता है.

केसर की रंगीन कहानी और 20 फायदे I केसर कैसे बनता है,Benefits of Saffron
केसर और उससे बने रंगीन मसाला 

सिकन्दर का महान कारनामा :

केसर को संस्कृत में कुमकुम, हिन्दी में केसर, गुजराती और मराठी में केशर, बंगला में जाफरान, तेलगू में कुमकुम पुव और लैटिन में क्रोकस सेटाईक्स के नाम से जाना जाता है. केसर की सबसे अधिक पैदावार ईरान में होती है. इसकी खेती स्पेन, इटली, ग्रीस, तुर्किस्तान, चीन तथा भारत में होती है. भारत में केसर की पौध कश्मीर में प्रचुर मात्रा में पैदा होती है. दुनिया को इस सबसे महंगे मसाले देने का श्रेय सम्राट सिकन्दर को जाता है. दो हजार वर्ष पर्व ग्रीस में सिंकदर की सेना ने ही इसकी खेती शुरू की थी. कहते हैं इसके बाद जहाँ-जहाँ सिकन्दर ने अपने पाँव पसारे वहाँ केसर ही पहुँचती गई.

केसर की रंगीन कहानी और 20 फायदे I केसर कैसे बनता है, Benefits of Saffron
केसर फूल से बनता है 


स्वाद में भरपूर बीमारियाँ करे कोसो दूर :  

होली को और भी रंगीन बनाने वाला केसर ठंडाई, शर्बत, श्रीखंड और कई मिष्ठानों में स्वाद और खुशबू भरने का काम करता है. केसर में विटामिन ए, सी, फाइबर, मैंगनीज, पोटेशियम, आयरन, प्रोटीन जैसे कई पोषक तत्व होते हैं. इस पर हुए कई वैज्ञानिक शोधों में पाया जाता है कि केसर दृष्टि में सुधार करता है और कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से भी रोकता है. इसके अलावा केसर पाचन और स्मरण शक्ति बढ़ाने, चेहरे की रंगत में सुधार लाने, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया कम करने सहित हृदय रोगों को दूर रखने में मदद करता है. केसर का दूध भी कई बीमारियों पर अंकुश लगाता है.
केसर की रंगीन कहानी और 20 फायदे I केसर कैसे बनता है, Benefits of Saffron
केसर फूल से बनता है


राजसी ठाठ का प्रतीक :

कहते हैं मिस्त्र की एक रानी केसर के बने कास्मेटिक ही उपयोग में लाती थी. इसी तरह अपनी थकान को दूर करने के लिए रोमके राजा-महाराजा तथा उच्च कुल के लोग केसर से भरे तकियों का इस्तेमाल करते थे ताकि केसर, की भीनी-भीनी खुशबू से नींद गहरी और अच्छी आए.
अंदाजा लगाना भी हैरान करने वाला है कि एक समय में ईरान के लोग कपड़ा बनाने में केसर के रंग का इस्तेमाल करते थे, इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहाँ पर केसर की पैदावर कितनी ज्यादा होती होगी. इतने गुणों वाली केसर का नाम इंग्लैण्ड के एसेक्स टाउन ऑफ़ चिपिंग वाल्डेन में इतना लोकप्रिय हुआ कि उन्होंने उस जगह का नामबदलकर ‘सेफ्रान वाल्डेन’ रख दिया.

होली का मजा दोगुना :

मुगलकाल में हिन्दू राज्यों में अलावा मुस्लिम शासकों में भी होली पर्व धूमधाम से मनाने की प्रथा थी. इतिहास पर नजर डालें तो अकबर, हुमायूँ, जहाँगीर, शाहजहाँ और बहादुरशाह जफ़र होली के आगमन ए बहुत पहले से ही रंगोत्सव की तैयारियां प्रारंभ कर देते थे. अकबर के महल में सोने-चाँदी के बड़े-बड़े बर्तनों में केवड़े तथा केसर से युक्त रंग घोला जाता था और राजा अपनी बेगमों के साथ होली खेलते थे. शाम कोमहलों में उम्दा केसिरिया ठंडाई, मिठाई और पान और इलायची से मेहमानों की आवभगत की जाती थी.

युद्ध छिड़े जिसके नाम पर :

केसर के बारे में एक रोचक किस्सा यह भी है कि 1374 में स्विटजरलैंड तथा आस्ट्रिया के बीच केसर के कारण सेफ्रान वार नामक युद्ध हुआ जो 15 सप्ताह तक चला. इसी तरह केसर के चर्चे जब अन्य देशों में फैलने लगे तो अफगानिस्तान में ड्रग्स की पैदावार को रोकने के लिए केसर की खेती के आदेश दिए गए और नतीजा यह हुआ कि यह आन्दोलन सफल भी हुआ. एक ऐतिहासिक तथ्य तो यहाँ तक कहा गया है कि मध्यकाल में कुछ लोगों ने नकली केसर बनाने की जुर्रत की थी, तो उन्हें सजा के तौर पर मृत्युदण्ड दिया गया था.

केसर के 20 चमत्कारी उपयोग :

  1.        हृदय की समस्या दूर करता है.

  2.        लीवर की शिकायत दूर करता है.

  3.        चेहरे पर पड़े किल मुंहासे तथा दाग धब्बे समस्या को दूर करने में करता है.

  4.        महिलाओं के मासिक धर्म की लक्षणों से राहत देता है.

  5.        मस्तिष्क संबंधी समस्या को दूर करता है.

  6.        घाव को भरने में कारगर साबित होता है

  7.        इसके सेवन से शरीर प्रतिरक्षा और ऊर्जा लेवल बढ़ता है.

  8.        खाना पचाने में मदद करता है.

  9.        दर्द भरे सूजन से राहत देता है.

10.        अपने चमकदार त्वचा के लिए.

11.        गर्भावस्था के समय इसका सेवन जरूर करना चाहिए.

12.        कैंसर की समस्या दूर करता है.

13.        कीट के काटने से राहत

14.        कीट-मकोड़े के काटने से राहत मिलती है.

15.        सेक्सुअल पावर बढ़ाने में किया जाता  है.

16.        आँखों की रोशनी की समस्या में सुधर हेतु.

17.        अस्थमा की शिकायत को दूर करने में किया जाता है.

18.        नींद न आने की समस्या को दूर करने में.

19.        गठिया के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है.

20.        बालों के झड़ने से रोकता है

21.        बालों के झड़ने या टूट गिरने से रोकता है.

 

केसर में पाये जाने वाले पोषक तत्व और उसकी मात्रा

ü ऊर्जा – 310 kacl

ü कार्बोहाइड्रेट – 65.37g

ü कुल लिपिड (वसा) – 5.83g

ü पानी – 11.90 g

ü प्रोटीन – 11.43g

ü फाइबर, कुल डाईटरी – 3.9g

मिनरल्स :

ü सोडियम – 148mg

ü मैग्नेशियम – 264 mg

ü फास्फोरस – 252mg

ü पोटैशियम – 170 mg

ü जिंक – 1.10mg

ü लौह तत्व – 11.11mg

विटामिन :

ª   थियामिन -0.115 mg

ª   नियासिन – 1.460mg

ª   फोलेट, डीएफई – 93mg

ª   राइबोफ्लेविन – 0.267mg

ª   विटामिन ए – IU530IU

ª   विटामिन ए, RAE 27

ª   विटामिन सी – 80.8