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बुधवार, 17 जून 2020

अनलॉक-1 में खुद को बचाते हुए कैसे आगे बढ़ना है और संक्रमण से बचे रहना है कैसे?

Manoj kumar

अनलॉक-1 में खुद को बचाते हुए बढ़ना है आगे


अनलॉक-1 में जनता को काफी छूटे दी गई हैं, लेकिन कोरोना के संक्रमण का खतरा भी बरकरार है. इससे बचने के लिए शारीरिक दूरी पौष्टिक आहार और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है. अगर हम बचाव के सामान्य उपायों को गंभीरता से लें तो निश्चित ही संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे.......
अनलॉक-1 में खुद को बचाते हुए बढ़ना है कैसे आगे बढ़ना है आगे और संक्रमण से बचे रहना है कैसे?, corona virus
unlock-1 corona case

कोविड-19 के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अनलाक-1 लागू होने के बाद से यह खतरा बढ़ गया है. ऐसे में संक्रमण को लेकर तनाव में आने से बचे. इस वक्त सरकार व समाज को मिलाकर ही काम करना होगा. इस महामारी की रोकथाम के लिए विज्ञान के नियमों को मानना जरूरी है और कोरोना से बचाव के लिए भीड़ से दुरी ही सबसे अहम टानिक है.

मास्क बना जीवन का अहम हिस्सा : 

बाहर निकलते समय अपना ख्याल रखना जरुरी है. तब तक कोरोना का संक्रमण बरकरार रहेगा, तब तक मास्क को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर रखना होगा. आने वाले दिनों में इन्फ्लुएंजा का संक्रमण भी होगा. इसलिए मास्क कोरोना के साथ-साथ इन्फ्लुएंजा से भी बचाए

थूक में कई घंटे तक रहता है वायरस:

हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत एक सामाजिक बुराई है. यहाँ काफी संख्या में लोग पान मसाला, गुटखा व तंबाकू खाते हैं. जबकि यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसके बिना जीवन नहीं चल सकता. इसका सेवन छोड़कर संक्रमण को कम किया जा सकता है. इससे खुद के साथ-साथ समाज का भी बचाव होगा, क्योंकि थूक में वायरस कई घंटो तक रहता है. इस वजह से दूसरों को कोरोना का संक्रमण होने का खतरा बना रहता है. धूमपान भी कतई न करें और यदि कोई धूमपान करता है तो उसे भी मना करें. वैसे भी सार्वजनिक स्थान पर धूमपान व थूकना गैरकानूनी है और इस पर जुर्माने का प्रावधान है.

जरूरी हो तो ही जाएं बाजरा:

कई लोगों को बाजार में घूमने की आदत होती है. बाजार में भीड़ अधिक होती है और शारीरिक दूरी के नियम का पालन आसान नहीं होता. बहुत जरुरी होने पर ही बाजार जाएँ. अब तो शहरों में बहुत सारी चीजें आनलाइन शापिंग का इस्तेमाल करें. अगर बाजार जाएँ तो शारीरिक दूरी का विशेष ख्याल रखें.

ज्यादा घाटक नहीं है वायरस :

तमाम बचाव के उपायों को अपनाने के बावजूद यदि कोई संक्रमित हो भी जाए तो ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह वायरस बहुत ज्यादा घातक नहीं है. देश में ज्यादातर लोगों में हल्का संक्रमण देखा जा रहा है. हल्का संक्रमण होने पर घबराकर तत्काल अस्पताल जाने से बचें. यदि हल्का संक्रमण है तो पांच से सात दिन में यह बीमारी ठीक हो जाती है. इसलिए खाँसी, जुकाम है तो घर में भी परिवार के अन्य सदस्यों से दूरी बनाकर रह सकते हैं. गले में खराश है तो गुनगुने पानी से गरारे करें. इसके अलावा भाप लें. यदि हल्का बुखार है तो उसकी दवा ले सकते हैं. यदि बुखार ज्यादा हो तो अपस्ताल में भर्ती होने की जरूरत है. इस तरीके से ही महामारी से पार पाया जा सकता है.

पौष्टिक आहार है जरूरी :

खानपान में दूध, पनीर, दाल सहित अन्य पौष्टिक चीजों का सेवन संतुलित मात्रा में करें. फल व हरी सब्जियों को नियमित रूप से भोजन में शामिल करें. भोजन पौष्टिक और हल्का ही लें और अधिक खाने से बचें. व्यायाम करते रहें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ. इसके अलावा पूरी नींद लें. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहेगी.

दफ्तर से आने के बाद करें स्नान :

दफ्तर से आने के बाद कई लोगों ने एक अच्छी आदत यह शुरू कर दी है कि जूते घर से बाहर निकालने के बाद सीधे नहाने जाते हैं. इसका पालन सभी लोगों को करना होगा. दफ्तर से घर पहुँचने के बाद अपने कपड़े साफ़ करें और स्नान जरूर करें. घर में कोई बुजुर्ग हो तो उनके पास जाने से बचें.

खुद को रखना होगा ध्यान :

अनलाक-1 में कुछ धार्मिक स्थल भी खुल गए हैं. लगभग ढाई माह से लोग धार्मिक स्थलों पर नहीं जा रहे थे. इस संक्रमण के बीच धार्मिक स्थल पर जाने कोई बहुत जरुरी काम नहीं है. वहाँ होने वाली भीड़ से खतरा हो सकता है. दुनिया में ऐसे कई उदाहरण मिले जब धार्मिक स्थलों पर भीड़ होने के कारण कोरोना का संक्रमण हुआ. इटली में चर्च की भीड़ से सक्रमण का मामला सामने आया था.

दूरी बनाकर रखें :

दफ्तर में भी घर की तरह साफ-सफाई होनी चाहिए. प्रतिदिन दो से तीन बार दफ्तर की सफाई जरुरी है. इसके अलावा, कर्मचारियों के हैण्ड वाश के लिए पूरी व्यवस्था होनी चाहिए कर्मचारी कम से कम दो मीटर की दूरी बनाकर रहें. व्यक्तिगत आदान-प्रदान कम होना चाहिए और एक-दूसरे से खाने का सामान कम ही साझा करना चाहिए.

तो न करें सफर :

यदि खाँसी, जुकाम व हल्का बुखार हो तो दफ्तर न जाएं. खाँसी जुकाम होने पर सार्वजनिक वाहनों में सफर भी न करें, क्योंकि इससे दूसरों को संक्रमण हो सकता है. सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय मास्क पहनकर रहें. कैब में चालक को भी मास्क पहनकर रहना जरूरी है. बचाव के लिए बस, रेलवे स्टेशन व सभी दफ्तरों में थर्मल स्कैनिंग की सुविधा जरुरी है.    

रविवार, 14 जून 2020

प्रतिरक्षा प्रणाली को लेकर ना हो परेशान II Corona Virus Immunity Power

Manoj kumar

प्रतिरक्षा प्रणाली को लेकर ना हो परेशान

कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हैं, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली क्षमता कमजोर हो गई है. ऐसे में कोरोना से लड़ने की हमारी कोशिशें कई बार प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने पर टिक जाती हैं. हालांकि प्रतिरक्षा प्रणाली बेहद जटिल है और इसे लेकर कई तरह के भ्रम हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए...
प्रतिरक्षा प्रणाली को लेकर ना हो परेशान, Corona Virus Immunity Power

       शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली


जटिल प्रतिरक्षा प्रणाली :

यह आम धारणा है कि प्रतिरक्षा प्रणाली वो है जिसे हम आसानी से पभावित कर सकते हैं. हालांकि उस वक्त संदेह होता है जब हमें पता चलता है कि यह कितना जटिल काम है. प्रतिरक्षा प्रणाली में सैकड़ों विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं, जो कई तरह के काम करती है चाहे वह रोगाणुओं की पहचान करनी हो या उन्हें नष्ट करना हो.

प्ररिरक्षा प्रणाली के दो भाग :

विस्तृत रूप से देखें तो प्रतिरक्षा प्रणाली के मुख्यतः दो भाग होते हैं. पहला सहज प्रतिक्रिया और दूसरा अर्जित प्रतिक्रिया. सहज प्रतिक्रिया रोगाणुओं को बाहर निकालने के जरिए समस्या पर अपनी प्रतिक्रिया देता है. जिसके कारण हमें बुखार और बेचैनी महसूस हो सकती है. अर्जित प्रतिक्रिया में रोगाणुओं से लड़ने के लिए उन सेल्स की पहचान की जाती है. इसके बाद इन सेल्स को लड़ने के लिए भेजा जाता है.

शोधकर्ताओं का आकलन :

ग्लास्गो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इनमे से कुछ सेल्स को देखने के लिए लेजर माइक्रोस्कोपी का उपयोग कर रहे हैं. प्रतिरक्षा प्रणाली के काम से पता चलता है कि वास्तव में यह प्रतिक्रिया कितनी जटिल और एकीकृत है. हमारे पूरे शरीर में हर समय विभिन्न प्रकार के सेल एक-दूसरे से बात कर रहे हैं और अभी भी एक बड़ा हिस्सा है जिसकी विविध पारस्परिक क्रियाओं को हम नहीं समझ सकते हैं.

जैविक उत्पाद :

जैविक उत्पादों में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो हमारे पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले होते हैं. अतीत में इन उत्पादों को प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार लाने वाला माना गया था, लेकिन यूरोपीय खाद्द सुरक्षा प्राधिकरण ने फैसला किया है कि वे वैज्ञानिक सबूतों की कमी के कारण प्रतिरक्षा में सुधार करने का दावा नहीं कर सकते. फ़िलहाल आँतों के माइक्रोबायोम पर शोध जारी है, उम्मीद है कि हम इस बार में ज्यादा बेहतर ढंग से समझ पाएंगे कि हमारी आंतों के बैक्टीरिया प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे प्रभावित कर सकते हैं.
विटामिन, मिनरल्स और हर्बल की आपूर्ति :
हमें अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वास्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की आवश्यकता होती है. जिन लोगों में विटामिन डी या विटामिन सी की कमी होती हैं, उन्हें इसे पूरक के रूप में लेने की आवश्यकता हो सकती हैं. हालाँकि, भोजन से विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जा सकते हैं, इसलिए यदि हम पोषक भोजन ले रहे हैं तो संभावना है कि हमें वह पोषण मिल रहा है, जिसकी हमें आवश्यकता है. हम सुझाव देने के लिए कोई सबूत नहीं है कि विटामिन के स्तर को और अधिक बढ़ाने से यह बीमारियों से लड़ने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा देगा.
संतुलन का महत्व:
प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करने पर ध्यान देने के बजाय अधिक उपयोग दृष्टिकोण सन्तुलन बनाना हो सकता है. क्योंकि एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली वह है जो संतुलित है. हम प्रतिरक्षा प्रणाली के बारे में असामान्य निष्क्रिय से असामान्य सक्रिय तक के पैमाने के बारे में सोच सकते हैं. हम जानते हैं कि प्रतिरक्षा प्रणाली हमारी सेल्स को ही लक्ष्य बनाना शुरू कर सकती है. संक्रमण से होने वाली गंभीर बीमारियां अक्सर शक्तिशाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण होती है.
ये करना चाहिए :
प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के बारे में सोचने के बजाय हमें स्वस्थ और संतुलित रखने के बारे में सोचना चाहिए. जब यह निर्णय लेना हो कि प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद के लिए उत्पादों को खरीदना हैं, तो हमें निश्चित संदेह बनाए रखना चाहिए. विटामिन और मिनरल्स उस स्थिति में मदद कर सकते हैं जब आप किसी विशिष्ट चीज में कमी कर रहे हैं. लेकिन यदि आप एक स्वस्थ संतुलित आहार ग्रहण कर रहे हैं और नियमित रूप से व्यायाम कर रहे हैं तो आप प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर रखने के लिए पर्याप्त कर रहे हैं.



शनिवार, 13 जून 2020

बेबी होगा बहुत स्मार्ट II जाने pregnant women को क्या क्या करना चाहिए

Manoj kumar

बेबी होगा बहुत स्मार्ट
हाल ही में हुए शोधों से पता चला है कि अगर गर्भावस्था के दौरान महिलाएँ शारीरिक रूप से सक्रिय रहती है तो होने वाला शिशु काफी स्मार्ट होता है.....
बेबी होगा बहुत स्मार्ट, pregnant women
pregnant women

प्रत्येक गर्भवती स्त्री की यही चाहत होती है कि उसका होने वाला  शिशु दूसरे बच्चों से स्वस्थ्य, सुन्दर और स्मार्ट हो. आपको यह दिली ख्वाहिश पूरी हो सकती है. बशर्ते आप अपनी गर्भावस्था के दौरान थोड़ा सा सचेत रहें.

हाल ही में कनाडा की मांट्रियल यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध-अध्ययन से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएँ शारीरिक और मानसिक रूप से जितना अधिक सक्रिय रहती है, उनके होने वाले शिशु का दिमाग भी उतना ही अधिक डेवलप होता है. नतीजतन आगे चलकर ऐसे शिशु अधिक स्मार्ट होते हैं.

शोध-अध्ययन से पता चला है कि शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहने वाली महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अधिक स्वस्थ रहती हैं साथ ही उन्हें छोटी-छोटी शारीरिक समस्याओं का भी सामना नहीं करना पड़ता है, जैसे गर्भावस्था के दौरान जी मिचलाना,सुबह के समय थकावट महसूस होना, रात में नींद न आना आदि-आदि. यही नहीं सक्रिय रहने वाली गभर्वती महिलाओं के होने वाले शिशु भी अधिक स्वस्थ रहते हैं और उन्हें शारीरिक समस्याओं का कम सामना करना पड़ता है.

कनाडाई वैज्ञानिकों का कहना है कि शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहने के साथ-साथ जो गभर्वती महिलाएँ अपने चिकित्सा से परामर्श करके सप्ताह से अधिक विभिन्न प्रकार के व्यायाम करती हैं उनके होने वाले शिशुओं की याददाश्त क्षमता भी अधिक होती है अर्थात वे शार्प मेमोरी वाले होते हैं. अध्ययनकर्ताओं के अनुसार अगर आप गर्भधारण करने की सोच रही हैं तो अभी से आपको सचेत हो जाना चाहिए और इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए. यदि आप गर्भावस्था के दिनों में हैं तो आपको अपने चिकित्सक से परामर्श करके कुछ व्यायाम अवश्य करने चाहिए. इसके अलावा अच्छी और ज्ञानवर्धक किताबों का पठन-पाठन भी करना चाहिए. इससे न केवल आपको फायदा होगा, बल्कि आपके होने वाले नन्हें-मुन्हें को भी.

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान दिल को सुकून देने वाला गीत-संगीत सुनना भी लाभदायक होता है. इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान कराए जाने वाले विभिन्न संस्कार भी शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि विभिन्न धर्मग्रंथों के अनुसार इन्सान के लिए होने वाले संस्कारों के बारे में अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग प्रकार से गर्भ संस्कार का जिक्र किया गया है. शोधों से भी पता चला है कि गर्भावस्था शिशु न केवल बाहरी बातों को सुनता  और समझता है, बल्कि वह अपने हिसाब से प्रतिक्रिया भी व्यक्त करता है.

शुक्रवार, 12 जून 2020

कैसे गर्मी में सेहत का रखें खास ख्याल II एक अलग Tips

Manoj kumar

गर्मी में सेहत का रखें खास ख्याल

मई में लॉकडाउन के चलते लू-लपट से भी बचे रह लोग. अब जब जून अनलॉक-1 लागू होने से चहल-पहल दोबारा शुरू हो गई है तो रखें सेहत का ख़ास ख्याल..
कैसे गर्मी में सेहत का रखें खास ख्याल, health
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बीते दिनों लोग घर से कम निकले. वाहनों की आवाजाही कम हुई तो प्रदुषण का स्तर भी घटा, जिससे अन्य सालों के मुकाबले कई बीमारियाँ कम देखने को मिलीं. उधर, सेनिटाइजर के ज्यादा उपयोग और लगातार मास्क लगाने की वजह से त्वचा की बीमारियाँ व अन्य तकलीफें बढ़ गई. अब अनलॉक-1 में चिकित्सों की सलाह है कि गर्मी में कोरोना संक्रमण से बचाव करते हुए दूसरी बिमारियों के प्रति सतर्कता बरतें.

पेट की बीमारियाँ हुई कम :

लॉकडाउन के चलते बाहर का खाना न खाने से इस साल गर्मी में पेट की बीमारियों के मामले कम देखने को मिले. हालांकि तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है. गर्मी से होने वाली पेट बीमारी और धूप लगने का खतरा पहले जैसा ही है. ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

इस तरह असर करती है गर्मी :

जब हम साधारण तापमान से तेज धूप में जाते हैं तो शरीर में पानी की कमी होने की वजह से पैरों में अकड़न समेत कई तरह की समस्याएँ होने लगती हैं. इस अव्यवस्था को ‘हीट एग्जास्ट’ की होती है. इसमें शरीर में पानी की बहुत कमी हो जाती है. बहुत ज्यादा थकान होती है और शरीर में दर्द होता है. तीसरी अवस्था ‘हीट स्ट्रोक’ की होती है. तीनों तरह की दिक्कतों से बचाव का एक ही तरीका है कि किसी न किसी रूप में पर्याप्त पानी का सेवन करें

साफ पानी है बड़ी जरूरत :

इन दिनों साफ़ पानी की उपलब्धता कम हो जाती है. ज्यादा प्यास लगने पर लोग यह नहीं देखते है कि पानी साफ़ है या नहीं इसे तुरंत पी जाते हैं. इनमें एक्यूट बैक्टीरियल गैस्ट्रोएंटाराइटिस, टाइफाड, पीलिया की समस्या हो जाती है. ऐसे में साफ पानी पिएँ और हो सके तो पानी उबालकर फिर से ठण्डा करके ही पिएँ.

बाहर की चीजें से रहे दूर :

अब रेस्त्रा, मौल और होटल वगैरह खोलने की अनुमति मिल गई है, लेकिन बाहर का खाना खाने में उत्सुकता न दिखाएं. गर्मी के दिनों में फ़ूड प्वाइजनिंग की बीमारी बहुत कम है. कई बार यह खतरनाक रूप ले लेती है. फ्रिज में रखी हुई चीजों को खाने केबाद फिर से फ्रिज में रख दिया जाता है और यह माना जाता है कि उसमें रखे खाद्द पदार्थ ख़राब नहीं होते, लेकिन शुरू हो जाते हैं. यह भी ध्यान रखें कि फ्रिज का तापमान कितना है. इसी से तय होता है कि इसमें रखी हुई चीजें खराब तो नहीं हो रही हैं.   

गुरुवार, 11 जून 2020

कोरोना वायरस के इस जंग में नींद है कारगर हथियार II नींद के क्या-क्या फायदे हैं

Manoj kumar

कोरोना वायरस के इस जंग में नींद है कारगर हथियार

मनोवैज्ञानिकशोध


दुनिया की मशहूर पत्रिका ‘डेली मेल’ में अच्छी नींद को वायरस संक्रमण के इस दौर में जरूरी बताया गया है. पत्रिका में ब्रिटेन के जाने माने डॉक्टर माइकल मोस्लेओ ने बताया कि कैसे अच्छी नींद लेकर लोग वायरस से एक कदम आगे जा सकते हैं. बेडटाइम हैबिट यानी सोने-जागने की आदतों को बेहतर कर लें तो वायरस को हराना मुश्किल नहीं है. उनके मुताबिक, जो लोग अभी नीदं के साथ संघर्ष कर रहे हैं वे अधिक थकान और मुड़ स्विंग के शिकार हो रहे हैं. खुद को एकाग्र नहीं रह पा रहे. बुरी खबर यह है कि यह आपके शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र यानी इम्युनिटी को भी कमजोर कर रहा है. रिसर्च में उन्होंने यह पाया कि जब अच्छी नींद लेते हैं तो आपका शरीर किटोकिंस बनाता है. यह एक ऐसा तत्व है जो आपके इम्यून सिस्टम से समन्वय स्थापित करता है ताकि किसी भी प्रकार के वायरस संक्रमण से बचा जा सके.
कोरोना वायरस के इस जंग में नींद है कारगर हथियार, sleep
अच्छी नींद 

मंगलवार, 9 जून 2020

वजन कम करने का सबसे आसान उपाय I वजन कम नहीं होने पर पैसे वापस कर दिये जायेंगे


वजन कम करने का सबसे उपाय 


पहले इस्तेमाल कीजिये फिर विश्वास कीजिये



यदि आप अधिक वजन से परेशान है जिससे आपके अंदर अधिक बीमारियाँ घर कर गई है आज आपको पूरी गारन्टी के साथ इसका लाफ मिलेगा अगर कोई लाभ नहीं होता है तो आपका रुपये आप कर दिए जाएँगे.
वजन कम करने का सबसे आसान उपाय, The easiest way to lose weight
वजन कैसे कम करते हैं 

हेलो दोस्तों मेरा नाम विनोद गुप्ता उम्र 50 वर्ष Active Life Group वाराणसी, उत्तर प्रदेश से हूँ. आज से 2 वर्ष पहले मैंने (हेल्दी एक्टिव लाइफस्टाइल) को अपने जीवन में अपनाया. जिसकी वजह से मैं और मेरा परिवार आज बहुत ही खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं. क्योंकि मेरा वजन 118 किलो था. मैंने अपना 42 किलो वजन कम कर लिया है. मैं पिछले 10 वर्षों से इन सारी बिमारियों से ग्रस्त था.जैसे बवासीर, डाइजेशन, इम्युनिटी, पत्थरी, कमजोरियों और लो एनर्जी रहना इन सारी समस्याओं से मैं छुटकारा पा लिया है.

मैं Wellness Coach आपकी और आपकी परिवार के लिए लगातार काम कर रहा हूँ. लोगों को जागरूक बना रहा हूँ, लोगों को जीवन भर कैसे स्वस्थ रखा जाए, उसी पर काम किया जा रहा है. क्या आप सभी घर बैठे स्वस्थ व फिट रहना चाहते हैं और अपने सेहत में बदलाव लाना चाहते हैं और इसके इस्तेमाल के इच्छुक हैं, तो निचे दिए गए कांटेक्ट नम्बर यानी की संपर्क सूत्र से आप प्राप्त कर सकते हैं.  अगर आपको इसके इस्तेमाल से किसी तरह की कोई लाभ नहीं होता प्रयोग करने के दिन से एक माह तक तो इसका पैसा आपको वापस कर दिया जाएगा. आपको जो प्रयोग करने के लिए दिए जाएँगे वे सभी पूरी तरह से प्रमाणिक चीजें है. इसका इस्तेमाल जरूर एक बार करके देखें. इस उत्पाद का ब्रांड अम्बेसडर क्रिकेट के विराट कोहली भी हैं और इस उत्पदात का इस्तेमाल भी करते हैं और साथ में कई महान हस्तियाँ भी हैं.

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वजन कैसे कम करे 

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आपको इस प्रोडक्ट के इस्तेमाल करने के दिन से एक महीने के अंदर आपके वजन में कमी नहीं आयी तो आपके पैसे वापस कर दिए जाएँगे. इस बात की प्रूफ आप दिखाए गए तस्वीर में देख सकते हैं. सिर्फ आप एक बार प्रयोग कर जरूर देखे भी आप बार – बार इसका उपयोग करने के लिए अपने दोस्त यार करीबी को भी बोलेंगे.  

शनिवार, 30 मई 2020

Good health कैसे बनाते हैं I 7 रहस्य जाने.......

Manoj kumar

सेहतमंद रहने के मूल मंत्र

सेहत भरे जीवन का राज इस लेख में आपको पढ़ने समझने को मिलेगा. 2020 की शुरुआत हो चुकी है. नव वर्ष के मौके पर परिवार के सभी सदस्यों को अपनी सेहत सही रखने केलिए अपने खानपान, व्यायाम और विश्राम पर पर्याप्त ध्यान देना जरूरी है. चुस्त – दुरुस्त रहने के लिए सभी लोगों को कुछ संकल्प लेकर उन पर अमल जरूरी करना चाहिए...... 

Good health, सेहत बनाने का तरीका
health
एक स्वस्थ जीवन का अर्थ सिर्फ बीमारी रहित होना नहीं है. स्वस्थ जीवन के संदर्भ में शारीरिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सुखी व स्वस्थ होना भी शामिल है. स्वस्थ रहकर ही आप स्वयं व परिवार के लिए साथ ही समाज के लिए सार्थक जीवन जी सकते हैं. सच तो यह है कि अच्छे स्वास्थ्य से जहाँ व्यक्ति बीमारियों से मुक्त रहता है, वहीँ उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ती है. हमारी हिन्दी भाषा के साहित्य में हिन्दी के भक्तिकाल के महान कवि गोस्वामी तुलसी दास जी ने सुदंर स्वास्थ्य के विषय में कहा ही कि ‘प्रथम स्वर्ग सुन्दर हो काया’ यानी उनका कहना है कि व्यक्ति के जीवन में तबियत के मामले में अमीर रहने से उसे सुन्दर स्वर्ग की तुलना की गई है. इस बात को आप व्यवहारिक जीवन में देखा सकते हैं जिस दिन आपकी या किसी की तबियत सही नहीं रहती है तो उस दिन व्यक्ति का जीवन खाली-खाली सा लगता है. उसके जीवन में सारी चीजें फ़ालतू लगती है. उसके जीवन में को उन चीजों का कोई अहमियत नहीं रह जाती है.
स्वस्थ रहने के लिए आपके जीवन में एक निश्चित दिनचर्या का होना बहुत जरुरी है. जिससे आपके जीवन के स्वास्थ्य की गाड़ी एक तेज रफ़्तार से जीवन के की दौड़ में आपको जिताएंगी.

खानपान :

जरूरत से कम पोषक तत्वों को ग्रहण करना कुपोषण कहलाता है. कुपोषण कई बीमारियों को बुलावा देता है, जैसे कमजोरी महसूस होना, शरीर में खून की कमी होना आदि. कुछ छोटी-मोटी बातों को ध्यान में रखकर आप समुचित आहार ग्रहण कर सकते हैं, 

यह कैसे करना चाहिए तो :-

1.    कभी भी सुबह नाश्ता किए बगैर घर से बाहर न जाएं. रात भर की के बाद दिमाग और शरीर के की ऊर्जा के लिए नाश्ता बहुत जरूरी है. सुबह के समय नाश्ता न करने से न केवल शरीर बल्कि मस्तिष्क भी सुस्त हो जाता है साथ ही एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है. रिफाइंड युक्त खानपान का प्रयोग कम से कम करें. 
2.    स्वस्थ रहने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप महंगे और विदेश खाद्द पदार्थ ही ग्रहण करें. अपने परिवेश में पाए जाने वाले खाद्द पदार्थ ज्यादा लाभकारी होते हैं. 
3.    भोजन की थाली में अलग-अलग रंगों के खाद्द पदार्थ जरूरी होने चाहिए, जैसे पीली दाल, हरी सब्जी, सफेद दही और रंग-बिरंगे सलाद. इससे शरीर के लिए सारे जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल जाएँगे. 
4.    रात का भोजन आठ-नौ बहे तक हर हाल में कर लेना चाहिए. बहुत डरे से भोजन करने पर रात में एसिड या जी मिचलाने की समस्या हो सकता है. 
5.    सेहत सही रखने के लिए प्रतिदिन आठ से दस गिलास पानी अवश्य पीजिए. 
6.    प्रतिदिन अलग-अलग रंग की दो-तीन कटोरी सब्जी तथा एक से दो प्लेट सलाद व फलों का सेवन करना चिहिए. 

व्यायाम :

प्रतिदिन लगभग एक घंटे का वक्त व्यायम के लिए आवश्य निकालें. व्यायाम किसी आयु विशेष के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि यह 70 साल वाले बुजुर्ग के लिए भी उतना है लाभकारी है, जितना कि पांच साल के बच्चों के लिए व्यायाम करने से हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और रक्त में कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रित कनरे में मदद मिलती है साथ ही मोटापा भी नियंत्रित होता है. इसके अलावा डिप्रेशन व नींद की समस्या को दूर करने में भी व्यायाम से मदद मिलती है. याद रखें व्यायाम अपनी क्षमता व रूचि के अनुसार करें. व्यायाम में पैदल चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, योग, प्राणायाम और नृत्य आदि को शामिल कर सकते हैं.

नींद :

निंद के दौरान भी हमारे शरीर के कई अंग और हमारा मस्तिष्क सक्रिय रहता है. अनेक हारमोंस नीदं के दौरान ही सक्रिय होते हैं. एक वयस्क को लगभग सात से आठ घंटे की नींद आवश्यक है. वहीँ छोटे बच्चों के लिए दस से बारह घंटे की नींद उनके तन-मन के संपूर्ण विकास के लिए लाभकारी है. अनिद्रा से डिप्रेशन, माइग्रेन और हृदय रोगों से संबंधित बीमारियाँ बढ़ रही हैं. 

दूर रहे नशे की लत से :

धूमपान और अन्य किसी भी तरह के नशे की लत आपके शरीर को ही नही, परिवार और आर्थिक स्थिति को भी लगातार कमजोर करती है. अगर आप प्रतिदिन नशा करेंगे तो आगे चलकर इन व्यसनों को छोड़ना मुश्किल हो जाएगा. देश में होने वाली कुल मौतों में से एक तिहाई मौतें धूमपान की लत से होने वाले रोगों के कारण ही होती हैं. अगर आप किसी तरह का नशा करते हैं तो आपको नए वर्ष में अपने आपको इस लत से मुक्त करने का प्रण लेना चाहिए. नशा करते हैं तो आपके नए वर्ष में अपने आपको इस लत से मुक्त करने का प्रण लेना चाहिए. नशा छोड़ने के सन्दर्भ में परामार्श के लिए अपने डाक्टरों से संपर्क करें. नशा छुड़ाने में व्यवहार चिकित्सा सहायक है. 

डिजिटल की सीमित प्रयोग होना चाहिए :

आज एक युग में कई नई समस्याएँ धीरे-धीरे हमारे जीवन में पैर पसार रही हैं, जैसे इन्टरनेट, सोशल मीडिया तथा स्क्रीन होम एडिक्शन आदि. एक शोध के अनुसार हर तीसरा व्यक्ति बार-बार फोन चेक करने, सोशल प्लेटफार्म पर ज्यादा समय बीतने और ऑनलाइन शॉपिंग आदि में काफी वक्त बिताता है. अगर व्यक्ति सोशल मिडिया की गतिविधियों में संलग्न नहीं रहता है तो वह अपने मन में एक कमी या बेचैनी महसूस करता है. यही नही वह लगातार अपने सोशल मिडिया स्टेट्स को लेकर भी एन्ग्जाइटी महसूस करता है. सोशल मिडिया भी के तरह की नशे की लत जैसी ही मानसिक बीमारी होती जा रही है. इससे बचाव के लिए कुछ उपाय अपनाएं जैसे :-    
1.     कभी भी खाना खाते समय टीवी, फोन या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण का इस्तेमाल न करें. इस बारे में अपने परिवार से चर्चा करके आपसी सहमति बनाएं. 
2.     घर में किसी भी बेडरूम में टीवी न हो साथ ही टीवी देखने का समय भी नियमित करें. 
3.     रात में फोन, लैपटॉप, आइपैड आदि को चार्जिंग पर लगाकर न छोडें. 
4.     सोते समय मोबाईल फोन को अपने शरीर से कम से कम तीन चर फुट की दूरी पर रखें. 
5.     समय निकालकर छुट्टी के दिनों और अन्य अवसरों पर सपरिवार घर से बाहर घुमने जाएँ, साथ ही नुई हाबीज भी विकसित करें और इंडोर गेम्स खेलें. 
6.     केवल फोन पर चैट करते रहने की बजाय समय-समय पर दोस्तों से निजी स्तर पर मिले. 

शरीर की नियमित जाँच :

जरूरी शारीरिक जांचे साल में कितनी बार हो, यह बात आयु, बीमारियों और परिवार की हेल्थहिस्ट्री पर निर्भर करती है. अगर आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं तो भी चालीस-पैंतालिस की उम्र के बाद साल में एक बार डाक्टर से मिलकर आवश्यक जांचे करवानी चाहिए. इससे समय रहते शारीरिक समस्याओं के बारे में पता चल जाता है. वैसे तो आजकल मार्केट के बहुत सारे हेल्थ पैकेज का प्रचलन है, आप अपने डाक्टरों की सलाह से ही जरूरी जांचे करवाएं. व्यर्थ में समय और धन की हानि न करें. 

टीकाकरण :

बच्चों और बड़ों दोनों को ही उनकी अवस्था के अनुसार टीकाकरण की जरूरत होती है. टीकाकरण बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर तरीका है. टीकाकरण आयु तथा मेडिकल कन्डीशन के आधार पर किया जाता है. समय पर टीका लगवाने से पीलिया (हेपेटाइटिस ए और बी), पोलियो, खसरा, मप्स, फ्लू,  न्युमोनिया आदि लगभग पन्द्रह बीमारियों से बचाव हो सकता है. आप अपने डाक्टरों से परामर्श करें कि कौन-कौन सा टीका अपने और परिवार के अन्य सदस्यों को लगवा सकते हैं.     

शुक्रवार, 29 मई 2020

What is the secret of laughing I बीमारियों से बचना है तो दिल खोलकर हँसना चाहिए

Manoj kumar

बीमारियों से बचना है तो दिल खोलकर हँसना चाहिए

हंसता हुआ, नूरानी चेहरा. कहने के लिए यह एक गीत की पंक्ति हैं, लेकिन यह बताने के लिए काफी है कि हँसता हुआ चेहरा हर किसी को पसंद होता है. दिल खोल कर हंसने का यह सिर्फ एक फायदा नहीं है, यह हर मर्ज की दवा है. स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे कई शोध हालिया वर्षों में सामने आए हैं, जिन्होंने बताया है कि दिल की बीमारी से कैलोरी कम करने के तलबगार तक हर कोई इससे फायदा उठा सकता है. बस जरूरत है खुलकर हंसने की. हंसने से आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर कर सकते हैं. बस जरूरत है खुलकर हंसने की. हंसने से आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर कर सकते हैं और अपने जीवन को सरस बना सकते हैं और अपने जीवन को सरस बना सकते हैं. कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में एकांतवास या क्वारंटाइन में रह रहे लोगों का अवसाद में चले जाना बहुत स्वाभाविक सी बात है. ऐसे में उन लोगों के लिए हँसना और इस दिन को ठहाका लगाते हुए बिताना किसी रामबाण से कम नहीं है. हंसने के फायदों प्र आधारित पेश है.

बीमारियों से बचना है तो दिल खोलकर हँसना चाहिए, What is the secret of laughing
हँसना

रामबाण औषधि :

हंसी मनुष्य के लिए अद्वितीय उपहार है. बीएमसी कंप्लीमेंट्री एण्ड अल्टरनेटिव मेडिसन ने 2010 में अपने शोध में बताया कि हँसी और मुस्कुराहट आमतौर पर अच्छी इच्छा के संदेश के रूप में होती है. वहीँ डेंटल एण्ड मेडिकल रिसर्च जर्नल में 2017 का अध्ययन में बताता है कि हंसने से उच्च रक्तचाप में कमी आती है. 2011 में अमेरिकन हार्ट एसोशिएशन के वैज्ञानिक सत्र में तीन महीने के लंबे अध्ययन के परिणाम प्रस्तुत किए गए. जिसमें शोधकर्ताओं ने 79प्रतिभागियों को संगीत सुनाया गया या लाफ्टर थेरेपी दी गई. जिन लोगों को लाफ्टर थेरेपी दी गई. जिन लोगों को लाफ्टर थेरेपी दी गई उनके ब्ल्दप्रेशर का स्तर 7 एमएमएचजी कम हुआ जबकि जिन्हें संगीत सुनाया गया उनका ब्लड प्रेशर 6 एमएमएचजी कम हुआ.

हँसेंगे तो मधुमेह से बचेंगे :

हंसी न्यूरोएण्डोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करती है, जो शरीर के ग्लूकोज स्तर की निगरानी करता है. तनाव, भय और चिंता जैसी नकारात्मक भावनाओं के कारण रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है. हंसी की एक अच्छी खुराक रक्त शर्करा को नियंत्रित करती है, क्योंकि यह ग्लूकोज उत्पादन के लिए जिम्मेदारी अंतत: स्रावी ग्रंथियों की मालिश करती है.

शरीर को आराम :

हंसने से पूरे शरीर को आराम मिलता है. एक अच्छी हँसी, शारीरिक तनाव से छुटकारा दिलाती है. जिससे आपकी माँसपेशिययों को करीब 45 मिनट तक आराम मिलता जय.

प्रतिरक्षा मजबूत :

हंसी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाती है. हँसी तनाव हार्मोन को कम करती है और प्रतिरक्षा कोशिकाओं और संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबाडी को बढाती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है.

भलाई की भावना :

हंसी से एंडोर्फिन हार्मोंन ज्यादा बनता है, इससे हमें अच्छा महसूस होता है. एंडोर्फिन भलाई की एक समग्र भावना को बढ़ावा देता है और यहाँ तक की अस्थायी रूप से दर्द से राहत दे सकता है.
दिल के दोस्त :हंसी दिल भी दोस्त है. यह रक्त वाहिकाओं के कार्य में सुधार करती है और रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देती है, जिससे आपको दिल के दौरे और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है.

जलती है कैलोरी :

हंसी से कौलोरी खर्च होती है. हालांकि यह जिम जाने का कोई प्रतिस्थापन नहीं है, लेकिन एक अध्ययन में पाया गया है कि दिन में 10 से 15 मिनट तक हंसना लगभग 40 कैलोरी जला सकती है.

गुस्से से निजात :

हंसी गुस्से के भारी बोझ को हल्का करती है. सामूहिक रूप से हँसना और भी अच्छा है. आप कड़वाहट या नाराजगी को के ओर रखकर के दिल खोलकर हँसे तो पाएंगे कि बिना टकराव के आगे बढने में सक्षम हो सकते हैं.

लंबा जीवन देने में मददगार :

हंसी आपको लंबे समय तक जीने में भी मदद कर सकती है. नार्वे में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि मजाकिया अंदाज वाले लोग दूसरों को बहुत ज्यादा पसंद आते हैं. कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए यह अंतर विशेष रूप से उल्लेखनी था.

एक हंसी देगी ख़ुशी :

आपके दिन की शुरुआत एक जोरदार ठहाके के साथ हो जाए तो आप चुस्त भी रहेंगे और दुरुस्त भी. आपकी सिर से लेकर एड़ी तक सारी मांसपेशियां खुल जाएंगी. रगों में खून का बहाव संतुलित हो जाएगा. मतलब एक हंसी आपको दिनभर ख़ुशी ही ख़ुशी देगी जैसे :
ü दिमाग की बत्ती जलती रहेगी. 
ü सोने के तरीके में होगा सुधार. 
ü निराशा-चिंता से दूर रहेंगे. 
ü तंत्रिका प्रणाली को संतुलित रखता है. मिजाज रहेगा सकारात्मक. 
ü याददाश्त बढ़ेगी. 
ü चुकियों में परेशानी का कर सकेंगे हल. 
ü प्रतिरक्षा तंत्र स्वस्थ रहेगा. 
ü तंत्रिका प्रणाली को संतुलित रखता है और मिजाज रहेगा सकारात्मक. 
ü सिक्स एप होगे और मजबूत. 
ü भरोसा बढ़ता है, रिश्तो में घनिष्ठता बढ़ती है. चुटकियों में परेशानी का कर सकेंगे हल. 
ü प्रतिरक्षी तंत्र स्वस्थ्य रहेगा. 
ü दिल रहता है सुरक्षित. 
ü भरोसा बढ़ाता है, रिश्तों में घनिष्ठता बढ़ाती है
ü रक्त नलिकाओं का मजबूत करता है, रक्त प्रवाह ठीक रहता है. 
ü छूमंतर हो जाएगा मांस पेशियों का खिंचाव  दर्द सहने की क्षमता बढाता है 

हंसने के और क्या-क्या फायदा है:

हंसने से तनाव और चिंता वाले लक्षण कम उत्पन्न होते हैं. हार्टअटैक आने व रक्तचाप बढ़ने की संभावना कम रहती है. इससे मधुमेह भी काबू में रहता है. साथ ही ब्रेन स्ट्रोक की संभावना कम होती है. रक्त परिसंचरण बढ़ने से प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. हंसना एक तरह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जैसा है. हंसने से हमारी मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है. हंसने से तनाव कम महसूस होता हैं और शरीर में पाजिटिव एनर्जी का संचार होता है. साथ ही शरीर में इंडोर्फिंन हार्मोन बनता है. जिससे हम सकारात्मक महसूस करते हैं.

हंसना मानसिक ही नहीं, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर खुराक है. मानसिक चिकित्सा में इसका अहम योगदान है. हंसने से हमारे दिमाग में पोस्टोगलैंडिन और डोपामाईन नामक रसायन पैदा होता है जो हमारी सिकुड़ी हुई नसों को खोलता है. यही वजह है कि तनाव को दूर करने के लिए इसका सहारा लिया जाता है. इसके अलावा हंसने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है. इसलिए जो हंसते रहते हैं या प्रसन्न रहते हैं वे लंबा जीवन जीते हैं. कोरोना के संक्रमण काल में इसका महत्व और बढ़ गया है. लॉकडाउन और कोरोना के कारण लोग तनाव में हैं. लोग मुश्किलों के बीच भी अगर प्रसन्न रहना सीख लेंगे तो यह बेहतर रहेगा.

हंसने पर फेफड़े की कार्यक्षमता बेहतर होती है. इससे फेफड़े से कार्बन डाईऑक्साइड बाहर आता है और मस्तिष्क को बेहतर ऑक्सीजन मिल पाता है. इससे मस्तिष्क की नसें अपने सही आकार में आती हैं. मस्तिष्क की नसें अपने सही आकार में आती है. मस्तिष्क में रक्त संचार बेहतर रहता है. हंसना योग की तरह फायदेमंद है. मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है. हंसने के दौरान एंडोर्फिन हार्मोन अधिक बनता है इससे ख़ुशी व अच्छा महसूस होता है और मस्तिष्क का तनाव दूर होता है. तनाव कई बीमारियों का कारण है. खुश रहना स्ट्रोक, हार्ट अटैक की बीमारियों से बचाव के लिए भी जरूरी है. 

हंसने से मानसिक और शारीरिक तनाव कम रहने के साथ शरीर स्वस्थ रहता है. हंसने में चेहरे की मांसपेशियां पर तनाव कम झलकता है. इससे शरीर की अंदर रक्त परिसंचरण भी बढ़ाता है और हार्मोन बाहर निकलता है. जिससे शरीर तनाव नहीं महसूस करता और स्वस्थ रहता है. हंसने के दौरान हमारे शरीर में एंटी वायरल कोशिकाएं तेजी से बनती है और हमारा प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. हंसने के दौरान कैलरी खर्च होती है. जिससे मोटापा की समस्या कम होती है. 15 मिनट तक हंसने से 10-40 कैलरी तक खर्च कर सकते हैं.