Manoj kumar
प्राणायाम योगासन से मजबूत करें फेफड़े और बढाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
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| ये 50 फायदे रोजाना प्राणायाम करने से होते हैं |
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात
कार्यक्रम के जरिये एक बार फिर देश को संबोधित किया है. इस दौरान उन्होंने कोरोना
से लड़ने में प्राणायाम और योग के फायदे गिनाए. उन्होंने कहा कि ये वायरस हमारे
रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन प्रणाली) को प्रभावित करता है. ऐसे में हमें इस रोग से
बचने के लिए परंपरागत तरीके की ओर लौटना चाहिए. जिनमें सबसे आसान और सबसे कारगर
तरीका प्राणायाम है. प्राणायाम हमारे फेफड़ों को मजबूत करने के साथ ही रोगों से
लड़ने की क्षमता को भी विकसित करता है. हम आपको बता रहें प्राणायाम और उन्हें कैसे
किया जाए :-
कपाल भांति :
कपालभाति में कमर सीधी रखें और सिद्धासन में
बैठककर दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखें. श्वांस को नाक से तेजी से बाहर
छोड़ें व पेट को अंदर की ओर खींचे. ध्यान रखें की श्वांस लेनी नहीं है, सिर्फ छोडनी
है. इससे श्वांस स्वतः ही अंदर चली जाएगी.
लाभ : शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद
करता है. अस्थमा, वजन कम करने; कब्ज, एसिडिटी, पेट संबंधी रोग दूर होते हैं.
इम्युनिटी बढाता है और श्वसन मार्ग को साफ करता है. मस्तिष्क को सक्रिय करने में
मदद करता है.
भस्त्रिका :
इस शब्द का शाब्दिक अर्थ धौंकिनी है. धौंकिनी की
तरह आवाज करते हुए शुद्ध वायु को अंदर लिया जाता है और अशुद्ध वायु को फेंका जाता
है. सिद्धासन में बैठकर गर्दन और रीढ़ को सीधा रखें. तेजगति से स्वांस लें और
छोड़ें. ध्यान रखें कि स्वांस लेते समय पेट फूलना चाहिए और श्वांस छोड़ते समय पेट
सिकुड़ना चाहिए.
लाभ : फेफड़ो की कार्यक्षमता को बढाता है. व्रत,
पित्त, काफ के दोषों को दूर करता है. मोटापा, दमा और स्वांस रोग दूर होते हैं.
स्नान रोगों में भी लाभकारी है.
उज्जायी प्राणायाम :
सुखासन में बैठकर मुँह को बन्द कर नाक के छिद्रों
से वायु को फेफड़ों में भरने तक साँस खींचे. कुछ देर वायु को अंदर ही रखें और फिर
नाक के दाएं छिद्र को बन्द कर वायु को धीरे-धीरे बाहर निकालें. ध्यान रखें कि वायु
को अंदर और बाहर खींचते समय खर्राटे की आवाज आए.
लाभ : श्वांस नलिका, थायराइड, स्वर तंत्र को
संतुलित करता है. कई बीमारियों से बचाता है.
भ्रामरी :
सुविधाजनक आसन में बैठकर आँखें बंद कर शरीर को
शिथिल करें. कानों को अंगूठे से बन्द करें और चारों अँगुलियों को सिर पर रखें लंबी
और गहरी स्वांस लें और फिर श्वांस को मधुमक्खी के गुंजन जैसी आवाज करते हुए साँस
बाहर निकालें.
लाभ : भय, अनिद्रा, चिंता, गुस्सा और मानसिक
विकारों में लाभकारी है. साइसन के रोगियों के लिएफायदेमंद.
अनुलोम विलोम :
सिद्धासन में बैठकर दाहिने हाथ के अंगूठे से
दाहिने नथुने क बन्द करें और बाएँ से स्वांस लें. पाँच तक गिनती करें और फिर बाएँ
नथुने को बन्द करें और दाएं नथुने से पांच की गिनती करते हुए आहिस्ता से श्वांस
छोड़ें. अब यही क्रम बाएँ हाथ और बाएँ नथुने से दोहराएँ. इस तरह से अनुलोम विलोम
प्राणायाम का एक चक्र पूरा होता है.
लाभ: नाड़ियों को शुद्ध करता है. तनाव, अवसाद कम
करता है. एकाग्रता में सुधीर और रक्त परिसंचरण को ठीक करता है.
शीतली :
आरामदायक स्थिति में बैठकर के जीभ को मोड़कर के
नली का आकारदें और मुँह केबाहर निकलकर श्वांस को पूरी क्षमता से अंदर लें.
लाभ : रक्तचाप कम करता है. पित्त दोष, डिप्रेशन
को दूर करता है. गर्मी से निजात दिलाता है. मानसिक शान्ति प्रदान करता है.







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