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सोमवार, 22 जून 2020

पेट के कृमि (Worms) क्या है? और इसके 30 आसान एवं उपलब्ध रामबाण घरेलू उपचार इन नुख्सें को आपको जरूर अपनाना चाहिए....

Manoj kumar

कृमि Worms

कृमि आँतों में पाये जाते हैं. कभी-कभी ये मल द्वार पर जाते हैं, दिखाई देते हैनं. टट्टी के साथ निकलते हैं. यह रोग बहुतायत में फैला हुआ है. दवा लेने से कृमि, कीड़े बाहर तो निकल आते हैं, लेकिन बनना बंद नहीं होता है. खान-पान को सुधार कर इस रोग से बचा जा सकता है. कृमि हमारे भोजन का अधिकांश हिस्सा खा जाता है और हमारे शरीर के आवश्यक पोषक तत्व को खा जाता और हमारा शरीर पोषक के कमी के कारण कुपोषण का शिकार हो जाता है.
पेट के कृमि


कृमि के रोगियों को शाम को मीठा दलिया खिलाकर प्रात: जुलाब देने से विशेष लाभ होता है. आँतों में मल जमा होने से कृमि पैदा होते हैं. अत: पेट साफ रखना चाहिए. कभी-कभी एनिमा भी लेना उपकारी है. ज्यादा मीठा खाने से भी कृमि पैदा होता है, अत: मीठा कम खाना चाहिए. सबसे पहले तीन दिन तक घी और काली मिर्च मिलाकर लें. इसमें मल फूल जाता है. और आँतों में मुलायम हो जाती है. फिर कब्ज में बताई गई कोई चीज लें. इससे दस्त साफ आने लगेगा. पेट की सारी गन्दगी बाहर निकल जाएगी. इसके बाद एक दिन गुड़ खायें. इससे पेट के सारे कीड़े एक जगह जमा हो जायेंगे. फिर कृमिनाशकदवा लेने से सब बाहर निकल जायेंगे. यहाँ बताई गई खाने-पीने की चीजें नियमित कुछ सप्ताह लेने से कृमि नष्ट हो जाते हैं.

कृमि को ख़त्म करने के लिए घरेलू उपाय जो रामबाण की तरह काम करता है. आपको एक बार इस नुस्खे को जरूर अपनाना चाहिए:-

हरड़ – हरड़ और वायबिडंग समान मात्रा में पीस कर बच्चों को चौथाई चम्मच, बड़ों को एकचम्मच गर्म पानी से नित्य सुबह-शाम खाने के बाद फँकी देने से कृमि नष्ट हो जाते हैं.

पपीता – पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिलाकर पीने से पेट की कीड़े मर जाते हैं. यह लगातार सात दिन लेने से ये समस्या पूरी तरह ख़त्म हो जाती हैं.

लहसुन – पाँच कली लहसुन की मुनक्का या शहद के साथ नित्य तीन बार सेवन करने से पेट की कृमि मर जाते हैं. दो-तीन माह सेवन करने से स्वास्थ्य उत्तम हो जाता है. कच्चा लहसुन खाने के बाद लेने से भी कृमि मर जाते हैं.

करेला – कृमि में करेला का रस पीना बहुत ही रामबाण माना जाता है.

छाछ – छाछ में नमक मिलाकर प्रात: पीने से पेट के कीड़े (कृमि) मर जाते हैं.

नीम – नीम का तेल पांच बूंद तक बालकों की आयु के अनुसार देने से पेट के कृमि मर जाते हैं.

शहद – सुबह शाम शहद लेने से कृमि में लाभ होता है.

अनार – अनार का रस नित्य पीने से कृमि नष्ट हो जाते हैं.

नारियल – नारियल का पानी पीकर कच्चा नारियल खाने से कृमि निकल जाते हैं.

पेठा – पेठे के सेवन से कृमि नष्ट हो जाते हैं.

बथुआ – कच्चे बथुए के रस के एक कप में स्वादानुसार नमक मिलाकर एक बार नित्य पीते रहने से कृमि मर जाते है. बथुए के बीज पिसे हुए, एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से भी कृमि मर जाते हैं.

परवल – परवल का साग कृमि-नाशक है.

पोदीना – आंत्र कृमि में पोदीने का रस आधा कप नित्य पीयें.

गुड़ – गुड़ कृमि-नाशक है. औषधि से पहले रोगी को गुड़ खिलावें. इससे आँतों में चिपके कृमि निकलकर गुड़ खाने लगेंगे फिर कृमिनाशक औषध से कृमि निकल जाते हैं.

हींग – छोटे बच्चों की गुदा में कृमि रेंगते हुए काभी-कभी दिखाई देते हैं. हींग को पानी में घोलकर रूई का फोया भिगोकर बच्चों की गुदा पर रखने से कृमि नष्ट हो जाते हैं. सूक्ष्म मात्रा में हींग खिलाने से बच्चों के पेट में कीड़े नहीं होते हैं.

टमाटर – लाला टमाटरों पर काली मिर्च, नमक, डाल कर प्रात: भूखे पेट खाने से कृमि मर जाते हैं.

प्याज – पेट में कृमि होने पर प्याज का रस एक चम्मच दो-दो घंटे से पिलाने से कीड़े मर जाते हैं.

नींबू – यदि पेट में कृमि उत्पन्न हो गये हैं तो नींबू के बीज पीस कर चूर्ण बना लें और चौथाई चम्मच पानी के साथ दिन में एक बार 7 दिन लगातार लें पेट के कृमि नष्ट हो जायेंगे.

सेब – दो सेब रात को कुछ दिन खाने से कृमि मरकर मल के साथ बाहर आ जाते हैं. सेब खाने के बाद रात भर पानी न पीयें.

आम – आम की गुठली का चूर्ण गरम पानी के साथ दो ग्राम देने से पेट के चुन्ने (कीड़े) मर जाते हैं.

आंवला – एक औंस ताजे आंवले का रस नित्य 5 दिन पीने से कृमि नष्ट हो जाते हैं.

अनन्नास – यह कृमिनाशक है. एक गिलास रस नित्य पियें.

पोदीना – पोदीने का रस कृमि मारता है.7 दिन पीयें.

शहतूत – यह या इसका शरबत पेट के कृमियों को नष्ट करता है.

गाजर – गाजर का रस आधा पाव नित्य प्रात: भूखे पेट दो सप्ताह तक पीने से पेट के कृमि निकल जाते हैं. कच्ची गाजर खाना भी लाभप्रद हैं.

अखरोट – कुछ दिन एक अखरोट खिलाकर दूध पिलायें. इससे बच्चों के कृमि निकल जाते हैं.

काली मिर्च – काली मिर्च एक ग्राम पीसकर छाछ या मट्ठे के साथ देने से पेट के कृमि दूर हो जाते हैं.

अजवाइन – इसका चूर्ण 4 ग्राम एक गिलास छाछ के साथ देने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते हैं. इसका तेल 7 बूंद तक देने से उदर – कृमि नष्ट हो जाते हैं.

पानी – कृमि होने पर खाना खाने के आधे घंटे बाद गरम – गरम पानी, जितना गरम पीया जा सके, लगातार पीते रहने से कृमि नष्ट हो जाते हैं.

नमक – आधा चम्मच नमक सुबह खाना खाने से पहले गर्म पानी से फँकी नित्य 10 दिन तक लें. इससे कृमि निकल जायेंगे और पैदा नहीं होंगे. केंचुए जैसे कीड़े भी पेट से निकल जायेंगे.

मसूर – मसूर की दाल खाना में शामिल करने से कृमि होने पर लाभदायक है. 

तुलसी – तुलसी की पत्तियों का रस पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं.  


रविवार, 21 जून 2020

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष चकित कर रहे हैं छोटे-छोटे बालक-बालिका के योगासन और फायदे

Manoj kumar

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष चकित कर रहे 

हैं छोटे-छोटे बालक-बालिका के योगासन

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष चकित कर रहे हैं छोटे-छोटे बालक-बालिका के योगासन और फायदे, inter national yoga day
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 June

लॉकडाउन के बीच बच्चों ने बहुत कुछ सीखा है. उन्हें अपनी सेहत का ध्यान भी रखना आ गया है. इसका नमूना उनका घर में रहकर योग व मेडिटेशन करना है. इससे न सिर्फ उनके तन-मन को नई स्फूर्ति मिल रही है, बल्कि जीवन में अनुशासन भी आया है. यही नहीं कुछ तो शोसल मिडिया पर दूसरों को भी योग सीखा रहे हैं. इन बाल योगियों से जनते हैं कि आखिर कितना फायदेमन्द है योग.....

एक ‘सूर्य नमस्कार’ अनगिनत शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ :  

योग शुरू करने को लेकर लोगों में अक्सर इस बात की चिंता रहती है कि उनके लिए कौन से आसन सही रहेंगे, उन्हें करने का सही तरीका क्या है, युग गुरु या किसी योगा एक्सपर्ट्स से कैसे मिला, जाए वगैरह-वगैरह बातें मन में सोचने लगते हैं. ऐसे सूर्य नमस्कार इन सभी सवालों के जवाब देता हैं. 12 आसनों से मिलकर बनी यह एक योग क्रिया पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काफी है. यही वजह है कि इसे संपूर्ण योग भी कहा जाता है.

हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों पहले योग के महत्व को समझा और इसे जीवन का आधार बनाया. माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेद्र मोदी ने योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई. कोरोना से लड़ाई में योग के महत्व हो आज पूरा विश्व मान रहा है.

किसी ने सच ही कहा है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. कमाल कोई भी दिखा, सकता है. साल 2019 के जुलाई महीने की सात तारीख थीं. जयपुर के जलमहल में एक अनोखा विश्व रिकार्ड बना. गाजियाबाद के सातवीं कक्षा के स्टूडेंट वरुण शर्मा ने एक घंटे 30 मिनट तक पश्चिमोत्तान आसन करके यह कीर्तिमान बनाया. वे सिर्फ यहीं नहीं रुके, बल्कि उसी वर्ष इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स एवं गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में भअपना नाम दर्ज कराया. इसके अलावा, मेरठ में आयोजित राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया. इन सब उपलब्धियों के लिए वरुण को योग रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया. आखिरकार छोटी उम्र में इतना सब करने की प्रेरणा कैसे मिली, पूछने पर वे बताते हैं, ‘मैंने अपने गुरु एवं माता पिता से बहुत कुछ सीखा है. भैया तेजस्वी शर्मा मेरी प्रेरणा रहे हैं. दूसरी कक्षा में था, तब से योग का अभ्यास कर रहा हूँ.इससे न सिर्फ मेरी एकाग्रता बढ़ी बल्कि पाजिटिव रहकर सारे काम, पढाई आदि कर पाता हूँ. जंक फ़ूड नहीं लेता. पौष्टिक भोजन करता हूँ, तो इम्युनिटी भी ठीक रहती है.’ अब आठवीं कक्षा में पढ़ रहे वरुण की मानें, तो हर बच्चे को योग जरूर करना चाहिए.

बड़ा पद्मासन कर बनाया रिकार्ड :

11 वीं की स्टूडेंट निशा शर्मा को भी योग से लगाव है. इससे इनके शरीर में इतना लचीलापन आ गाय है कि वे कठिन से कठिन आसनों को सरलता से कर लेती है. इनके मानें, तो अभ्यास करने से कुछ भी असंभव नहीं लगता है. मन हल्का रहता है. निशा एक घंटे 50 मिनट में बड़ा पद्मासन लगाकर गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम भी दर्ज करा चुकी है. इसके अलावा, उन्होंने 1019 के जून महीने में दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योगासन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था. साथ ही, स्टेट लेवल चैम्पियन में भी ब्रांज मेडल हासिल किया है. स्क्रीन पर ज्यादातर वक्त बीतने वाले बच्चों-किशोरों को नसीहत देते हुए वे कहती हैं, ‘हमें अपना ख़याल खुद रखना चाहिए. आँखों पर जोर देने से अच्छा है कि हम योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. इससे न सिर्फ हमारी बाडी में फ्लेक्सिबिलिटी आती है, बल्कि हम एलर्ट भी रहते हैं. मन भी खुश रहता है.

योग बढ़ा रहा आत्मविश्वास:

नौवीं कक्षा की स्टूडेंट वास्तिक आर्या ने छुट्टियों में जब योग सीखा, तो उन्हें इतना अच्छा लगा कि बाद में उन्होंने बाकायदा योग को क्लासेज ज्वाइन कर लीं. अब वे सुबह-शाम नियमित रूप से योगाभ्यास करती हैं. वास्तविक बताती हैं, ‘मेरे अदंर के आत्मविश्वास आया है कि मैं कुछ भी कर सकती हूँ. चीजों पर फोकस बढ़ा है. बाडी में फ्लेक्सिबिलिटी और लाइफ में अनुशासन आया है.’ इन दिनों जब अधिकतर किशोर व बच्चे मोबाईल गेम खेलने या टीवी देखने में समय बिता रहे हैं, वस्तिका अपनी माँ के साथ योग की online क्लासेज भी लेती हैं. नि:संदेह योग ने बच्चों-किशोरों के जीवन में भी नई ऊर्जा का संचार किया है. वे जान गए हैं कि इससे उनके तन मन को कितना फायदा होता है. अच्छी बात यह है कि आयुष मंत्रालय, योग स्पोर्ट्स एसोसिएशन एवं फिजिकल एजुकेशन फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया जैसे संस्थान स्कूली स्तर पर बच्चों को योग के प्रति जागरूक कर रहे हैं.

शनिवार, 20 जून 2020

जीवन का मंत्र संगीत और योग है और इनसे क्या-क्या फायदे हैं, तो इसके विषय में जानते हैं

Manoj kumar


जीवन का मंत्र संगीत और योग है 


21 जून का दिन खास है, क्योंकि दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और विश्व संगीत दिवस, दोनों मनाए जाते हैं. दोनों विधाएँ मिलकर न सिर्फ मानसिक शान्ति और संबल प्रदान करती हैं, बल्कि कोरोना को हराने के लिए जरूरी रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं. संगीत जगत से जुड़े कलाकार मानते हैं कि योग और संगीत हैं एक-दूसरे के पूरक है........
वन का मंत्र संगीत और योग है और इनसे क्या-क्या फायदे हैं, तो इसके विषय में जानते हैं, yoga and music
योग और संगीत 

विभिन्न शोध अध्ययन में कहा गया है कि संगीत सुनने या गुनगुनाने से आपकी मानसिक स्थिति बेहतर होती है, जबकि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी हैं. संगीत और योग के मेल पर भजन गायक अनूप जलोटा का कहना है कि कमजोर इन्सान गाना नहीं गा सकता है. इसके लिए स्वस्थ शरीर के साथ सांसों का साथ देना भी जरूरी है. योग के कुछ आसन आपकी सांसों को मजूबत बनाते हैं. मैं कितना ही व्यस्त क्यों न रहूँ, रोजाना एक से डेढ़ घंटे योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन करता हूँ. ये मेरी संगीत साधना का अहम हिस्सा हैं.

मिलकर बनाएँगे पृथ्वी सुरक्षित :

संगीत और योग का मेल संतुलित मस्तिष्क औरजीवन के लिए जरूरी है. योग संगीत जगत से जुड़े हुए लोगों की जिन्दगी का अहम हिस्सा है. गायक कैलाश खेर का कहना है कि संगीत और योग ही हैं, जो पृथ्वी को बचाएंगे. दवाओं से तो शारीरिक रोग दूर होते हैं, लेकिन मानसिक रोग तो योग से ही दूर होंगे. कोरोना संकट में उपजे तनाव से दूरी बनाए रखने में संगीत एक मजबूत सहारा रहा है. सुख की घड़ी हो या दुःख की, संगीत हमारे जीवन का पूरक रहा है, पुराने गानों में समर्पण दिखता था, जैसे कोई आराधना हो रही हो. प्रेम को हल्के में नहीं लिया जाता था. मेरे गानों में अध्यात्म ही झलक है. आध्यात्मिक संगीत थेरेपी की तरह होता है. आप उसमें रम जाते हैं. संगीत और योग आपके तनाव को दूर कर देता है. मेरे घर में योग का माहौल है. 

सांमजस्य से होती साधना पूरी :

गौर करें तो योग और संगीत दोनों के लिए माहौल भी कमोबेश एकसमान होता है. इस संबंध में गायिका शिल्पा राव कहती हैं कि संगीत हो या योग, दोनों सी साधना हैं. उन्हें आपको एकाग्रचित होकर करना होता है. दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमन्द हैं और आपको प्रसन्न रखते हैं. ये आपमें ऊर्जा का संचार करते हैं. आपके बिगड़े मूड को भी बना देते हैं. संगीत में स्वरों की श्द्धता पर जोर दिया जाता है, वहीँ योग में आसन और मुद्राओं पर ध्यान केन्द्रित रहता है. दोनों में ही स्वर व मुद्रा की श्रेष्ठता से आनन्द और स्वास्थ्य पाया जा सकता है. इस दृष्टि से दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. संगीत में एक ही स्थान पर साधना करने के लिए शरीर, मन व मस्तिष्क पूर्ण स्वस्थ होना चाहिए. उसमें योग अहम भूमिका निभा सकता है.

योग और संगीत कला है:

गायक जुबिन नौटियाल का मानना है कि योग और संगीत दोनों ही कला से जुड़े हैं. योग में आपको अपना मस्तिष्क एक जगह पर केद्रित करना होता है, ठीक उसी तरह जैसे संगीत बनाते वक्त आपको अपना सौ प्रतिशत ध्यान लगाना होता है. योग और संगीत एक साथ चलते हैं. दोनों ही संतुलित जीवन और मस्तिष्क के लिए बहुत काम आते हैं.

तन मन की शुद्धता का स्रोत :

संगीत की बात हो और उसमें भक्ति रस का जिक्र न आए, ऐसा तो संभव ही नहीं. भक्ति आधारित संगीत भले ही फिल्मों में कम दिखता है, लेकिन इसके प्रति लगाव कभी कम नहीं होता. अनूप जलोटा कहते हैं कि फिल्म में भजन हो या न हो, भक्ति संगीत अमर रहेगा. लोग भजन से कभी दूर नहीं होते. जिस तरह से योग आपके तनाव को दूर करता है उसी तरह ईश्वर की भक्ति में लीन होने पर आप अपने सारे तनावों और दुखों को भूल जाते हैं. यह संगीत का चमत्कार होता है. दरअसल, योग और संगीत के खूबसूरत सामंजस्य का उद्देश्य तन के साथ मन की शुद्धता को हासिल करना है.स्वरों की उपासना, रियाज,शास्त्र सम्मत पद्धति द्वारा नाद ब्रह्म की आराधना कर अंतर्मन में गहराई तक उतारना संगीत का मुख्याल लक्ष्य है. संगीत शास्त्र व अध्यात्म जड़े हुए हैं,क्योंकि दोनों का उद्देश्य एकसमान है. दोनों में आत्म साक्षात्कार होता है.

संगीत को सुनते हुए करें योग :

वेस्ट वर्जीनिया यूनिर्वसिटी के स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर किम इन्स ने अपने शोध अध्ययन में वैज्ञानिक तरीके से तस्दीक की है कि जब बात संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की हो तो मेडिटेशन और म्यूजिक दोनों समान रूप से कारगर हैं. संगीत ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल के स्तर को कम करता है,वहीँ योगासन के अंतर्गत ध्यान और प्रणायाम के जरिए तनाव, ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, दिल की जिसकी वजह से मन प्रसन्न और शारीरिक निरोगी रहता है. संगीत सुनते हुए ध्यान और योग करने का विचार बेहतरीन है.

शुक्रवार, 19 जून 2020

लॉकडाउन में अर्निग का डिजिटल प्लेटफॉर्म यह online पैसा कमाने का अच्छा तरीका है, वह भी घर बैठे....

Manoj kumar

लॉकडाउन में अर्निग का डिजिटल प्लेटफॉर्म यह online पैसा कमाने का अच्छा तरीका

इंटरनेट का इस्तेमाल अब केवल सोशल मिडिया या फिर इंटरनेट सर्फिंग तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका इस्तेमाल घर बैठे कमाई के लिए आजकल बहुत सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जो इसे तरह के अवसर मुहैया कराते हैं. बस इस बात की है कि आप अपने किस टैलेन्ट को इन प्लेटफ़ॉर्म पर लाना चाहती हैं. अगर पढ़ाने का शौक है, तो ऑनलाइन ट्यूशन ले सकती हैं, अगर कुकिंग पसंद हैं, तो youtube वीडियो बना सकती हैं. लिखना पसंद हजी, तो फिर फ्रिलांस राइटिंग वेबसाइट आदि की मदद ली जा सकती है.

लॉकडाउन में अर्निग का डिजिटल प्लेटफॉर्म यह online पैसा कमाने का अच्छा तरीका, earn money online
पैसा कमाने का तरीका 


वर्चुअल असिस्टेन्ट :

अगर आपको लोगों से बातचीत करना पसंद है और कम्युनिकेशन स्किल के साथ लैंग्वेज पर भी अच्छी पकड है, तो फिर घर बैठे वर्चुअल असिस्टेंट का कार्य किया जा सकता है. वर्चुअल असिस्टेंट का कार्य धीरे-धीरे भारत में लोकप्रिय हो रहा है. यह एक्स्ट्रा अर्निंग का एक अच्छा जरिया बन सकता है. आमतौर पर ऑफिसों में जिस तरह के कार्य पर्सनल असिस्टेंट करते हैं, कमोबेश उसी तरह का कार्य वर्चुअल असिस्टेंट का भी होता है. इसमें अलग – अलग तरह के एडमिनिस्ट्रेटिव कार्य होते हैं,जैसे कि मीटिंग शेड्यूल करना, फोन कॉल, डाटा एंट्री आदि. वर्चुअल असिस्टेन्ट क्लाइंट के साथ काम करके उन्हें उनके बिजनेस में भी मदद करते हैं. अगर आपको वर्चुअल असिस्टेन्ट का कार्य पसंद है, तो फिर अपवर्क (upwork.com) , जर्टुअल (Zirtual.com), बेलेय (belaysolutions.com), फेंसीहैंड्स (fancyhands.com) जैसी साईट्स को ट्राई किया जा सकता है.

फ्रीलांस वर्क :

फ्रीलांस जॉब का क्रेज तेजी से बढ़ा है. खासकर जो लोग टैलेन्ट हैं, उनके लिए फ्रीलांस वर्क तलाश करना मुश्किल नहीं होती है. अच्छी बात यह है कि इससे घर बैठे अच्छी कमाई हो जाती है. अगर कन्टेन्ट राइटिंग में माहिर हैं, तो इसके लिए कन्टेन्ट (content.co), ऑल फ्रीलांस राइटिंग (allfreelancewriting.com) पबलॉफ्ट (publoft.com) जैसी साइट्स लोकप्रिय हैं. अगर आप अन्य तरह की फ्रीलांस जॉब तलाशना चाहती है, तो फिर फ्रीलांसर (freelancer.com), (worknhire.Com) वर्क हायर, (flexijobs.com) फ्लैशजॉब्स, (cloudpeeps.com)  क्लाउड पिप्स, (peopleperhour.com) पीपल पर आवर जैसी साइट्स पर विजिट किया जा सकता है. यहाँ पर फ्रीलांस कार्य के साथ पार्ट जॉब्स भी सर्च किए जा सकते हैं.  

एफ़िलिएट मार्केटिंग :

अगर आप को वेबसाइट या फिर ब्लॉग चालाते हैं, तो फिर घर बैठे एफ़िलीएट मार्केटिंग के माध्यम से बी कमाई कर सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए न तो आपको किसी की मदद लेने की जरूरत है और न ही बहुत ज्यादा टेक्निकल नालेज की जरूरत पड़ती है. आप अपनी वेबसाईट के माध्यम से कुछ वेबसाईट की सर्विसेज को प्रोमोट कर कमाई कर सकती है. उदारहण के तौर पर अगल अमेजन एफ़िलीएटेड प्रोग्राम या फिर फ्लिपकार्ट एफ़िलीएटेड प्रोग्राम को ज्वाइन कर लेती हैं, तो फिर उसके बाद अगर कंपनी के किसी प्रोडक्ट को अपनी साइट या ब्लॉग के जरिए प्रोमोट करना चाहते हैं, तो कंपनी उस प्रोडक्ट के लिए आपको एक खास एफिलिएट लिंक प्रोवाइड करती है. आप उस लिंगक को ब्लॉग, फेसबुक पेज, इन्स्टाग्राम या ट्विटर पर भी लगा सकती हैं. अगर कोई व्यक्ति उस एफिलिएट लिंक के द्वारा प्रोडक्ट को खरीद लेता हैं, उस पर कंपनी कमीशन देती है. यही प्रोसेस एफिलिएट मार्केटिंग कहलाता है. आज जिस तरह से लोग ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीद रहे हैं, उससे एफिलिएट मार्केटिंग कमाई का एक अच्छा तरीका हो सकता है.

ऑनलाइन ट्यूशन :

आप टेक सेवी है और सब्जेक्ट्स पर अच्छी पकड़ रखते हैं, तो फिर ऑनलाइन ट्यूशन ट्राई किया जा सकता है. इसकी मदद से घर बैठे दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे स्टूडेंट्स को ऑनलाइन पढ़ा सकते हैं. इस माध्यम से स्टूडेंट्स वर्चुअली टिचर के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं. ई-ट्यूटरिंग एक वर्चुअल टूल, व्हाइट बोर्ड और चैटिंग की सुविधा होती है. ऑनलाइन ट्यूशन जॉब तलाशना चाहती है, तो फिर क्युरियो गुरु (qriyo.com), जेनेक्स्ट ट्यूटर्स (genextstudents.com), टयूटरइंडिया (tutorindian.net), लर्न पिक (learnpick.in), भारत टयूटर (bharattutors.com) जैसी साइट्स की मदद ले सकते हैं. हालांकि इन प्लेटफॉर्म्स पर ट्यूशन जॉब हासिल करने से पहले आपको अपना प्रोफाइल बनाने के साथ एक टेस्ट देना होगा. अगर आप सलेक्ट हो जाते हैं, तो फिर यहाँ से कार्य हासिल किया जा सकता है. इसके अलावा, माईफ्लैक्सीट्यूटर एप की मदद भी ले सकती हैं. यहाँ पर ट्यूटर के तौर पर रजिस्टर कर बच्चों को ट्यूशन दे सकती है.

YouTube चैनल :

आप टेक सेवी हैं और घर बैठे अर्निंग करना चाहते हैं, तो आज youtube इसका सबसे लोकप्रिय जरिया बन गया है. लोग इस प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों-करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. इसके लिए जरूरी है कि आप कैमरा फेस करते समय सहज महसूस करते हो और आपको अपनी पसंद के टॉपिक्स के हिसाब से चैनल तैयार कर सकती है. अगर आपको कुकिंग पसंद है, तो इस पर चैनल बना सकती हैं या फिर ट्रैवल्स पसंद है तो यह भी अच्छा विकल्प हो सकता है.

इसके लिए आपको एक youtube चैनल क्रिएट करना होगा और यह मुश्किल कार्य नहीं है. चैनल शुरू करने के लिए गूगल यानी जीमेल एकाउंट्स होना जरूरी हैं. फिर youtube. com को open करने के बाद टॉप में दायीं तरफ साइनइन का ऑप्शन दिखाई देगा. उस पर क्लिक करके अपने गूगल एकाउंट्स साइनइन कर लीजिए. युटूब वेबसाईट खुलने के बाद दायीं तरफ टॉप कार्नर में आपको प्रोफाइल का आइकन दिखाई देगा. इस पर क्लिक करने के बाद क्रिएट स्टूडियों के साथ आपको सेटिंग्स का आइकन दिखाई देगा. सेटिंग्स का आइकन दिखाई देगा. सेटिंग्स पर क्लिक करने के बाद ओवरव्यू में क्रिएट ए चैनल का विकल्प दिखाई देगा. यहाँ पर पर्सनल, बिजनेस या फिर दूसरे नाम से चैनल बनाने का आप्शन मिलता है. फिर आपको अपने चैनल का कोई नाम रखते समय आपको यह ध्यान रखना होगा कि वह आपके विषय से जुड़ा हुआ हो.

एक बार नाम सेलेक्ट करने के बाद आपको कैटेगरी सलेक्ट करना होगा. इसके बाद आपको यहाँ पर कुछ टर्म पर अपनी सहमति देनी होगी. लेकिन सहमति से पहले चीजों को ध्यान से पढ़ लें. इसके बाद नीचे डन पर क्लिक करने के बाद आपका youtube चैनल तैयार हो जाएगा. अब आप वीडियो अपलोड करना चाहते हैं, तो आपको youtube चैनल में दायीं तरह प्रोफाइल आइकन के बगल में वीडियो अपलोड (ऊपर की तरफ एरो वाला आइकन) विकल्प मिलेगा. इस पर क्लिक कर वीडियो के लिए पब्लिक, अनलिमिस्टेड और प्राइवेट का विकल्प मिलेगा. अब यह आपको तय करना होगा कि वीडियो को किस मोड में रखना है.  

गुरुवार, 18 जून 2020

योग से जोड़ें प्रतिरोधक क्षमता के तार II क्या आप जानते हैं इससे क्या-क्या फायदे हैं

Manoj kumar

योग से जोड़ें प्रतिरोधक क्षमता के तार

कोरोना सक्रमण से बचाने के लिए संयमित जीवनशैली के साथ ही योग भी महत्वपूर्ण माना गया है. प्रख्यात योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार सात्विक जीवन पद्धति व योग के संयोग से हम ऐसी तमाम चुनौतियों से निपटने की ऊर्जा हासिल कर सकते हैं………
योग से जोड़ें प्रतिरोधक क्षमता के तार, immunity power ofyoga
योग आसन से लाभ

दुनिया को भारत का तोहफा है योग. आज जब वैश्विक महामारी के रूप में कोरोना संक्रमण अपना आतंक मचाए हुए है तो ऐसे में योग एक बार फिर मददगार साबित हुआ. हर किसी ने माना कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता ही सबसे महत्वपूर्ण है. वहीँ चहुओर फैले भयाक्रांत माहौल में भी मानसिक तौर पर मजबूत रहने की बात हो रही है. शारीरिक व मानसिक, दोनों ही प्रकार की मजबूती हासिल करने में योग और प्राणायाम की भूमिका हर कोई स्वीकार रहा है. योग व सात्विक जीवन पद्धति अपनाकर ही हम इन चुनौतियों से निपटने की ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर सकते हैं.

योग से करें दिन शूरू :

रक्तचाप, तनाव, मधुमेह, हृदय रोग जैसे जीवन शैली आधारित बीमारियों से लगभग हर कोई परेशान है. उस पर चिंताजनक बात यह रही कि कोरोना वायरस का संक्रमण उन लोगों के लिए गंभीर ख़तरा है, जो उपरोक्त में से किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं. ऐसे में प्राणायाम और आसनों के जरिए इन सभी तकलीफों से बचा जा सकता है. अच्छी बात यह है कि इन क्रियाओं को रोकने में समय भी अधिक नहीं लगता. आप चाहे कितने भी व्यस्त रहें लेकिन दिनचर्या में से रोज सुबह शान्त, शीतल और स्वच्छ वायु वाले वातावरण में कम से कम दस मिनट का समय तो निकाल ही सकते हैं. यह न सिर्फ कोरोना  संक्रमण, बल्कि अन्य रोगों के प्रभाव से भी मुक्ति दिला देगा. इसमें प्राणायाम सबसे अधिक लाभकारी है. नियमित योगासन करने से शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की वृद्धि होती है. इन्हीं की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

मानसिक सबलता में सहायक :

कोरोना काल में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आत्मबल की मजबूती भी बेहद जरुरी है. ऐसे में मानसिक शान्ति के लिहाज से ध्यान और प्राणायाम अत्यधिक महत्वपूर्ण साबित होते हैं. इससे हमें चार प्रकार का बल यानी शारीरिक बल, मनोबल, प्राणबल और आत्मबल मिलता है. ये चारों बल जब शरीर में बेहतर तरीके से विकसित होते हैं तो इसी को इम्युनिटी कहते हैं.

खानपान का अहम योगदान :

शारीरिक व मानसिक क्षमता के साथ ही भोजन का भी बड़ा महत्व होता है. भोजन हमेशा शुद्ध, सात्विक और ताजा लेना ही श्रेयस्कर रहता है. जितना हो सके, मांसाहार से परहेज करें. आयुर्वेद में भी शाकाहार के कई लाभ बताएं गए हैं. मौसम के हिसाब से आहार का चुनाव करें. इसके अलावा तुलसी, गिलोय और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर दिन में तीन से चार बार लेना चाहिए. इससे शरीर की इम्युनिटी मजबूत होती है.

5 प्राणायाम देंगे मजबूती :

पाँच तरह के प्राणायाम से हम शरीर के हर भाग को मजबूत बना सकते हैं. ये पाँच प्राणायाम हैं जैसे : भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उज्जायी. नियमित रूप से इनका अभ्यास करने से हम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं. इनके अलावा सूर्य नमस्कार व ध्यान भी बेहद प्रभावशाली हैं. सूर्य नमस्कार जहाँ हमारे शरीर, इन्द्रियों, विचारों और भावनाओं में संवेदना का संचार करता है, वहीं ध्यान हमारी आत्मशक्ति बढ़ाकर तनाव दूर करता है.
Ø भस्त्रिका : पाचन तंत्र, हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के साथ ही पित्त और कफ को भी संतुलित रखता है. 
Ø कपालभाति : शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखने में सहायक है. 
Ø अनुलोमविलोम : हृदय रोगियों के लिए विशेष तौर पर फायदेमंद होता है. 
Ø भ्रामरी : तनाव से मुक्त रखने में सहायक होता है. 
Ø उज्जायी : माइग्रेन और अवसाद से निजात दिलाता है.
 

5 तरह के विशेष आसन :

ü पवनमुक्तासन : वायु विकास और कब्ज को दूर करने में बेहद प्रभावी होता है. 
ü उष्ट्रासन : पाचन तंत्र, अमाशय और आंतों में खिंचाव पैदा करता है. इससे जठराग्नि प्रदीप्त होकर भूख बढ़ाती है. कमर दर्द के रोगी भी इसे आसानी कर सकते हैं. 
ü पाश्चिमोत्तानासन : यकृत (लीवर), आगनाश्य और अधिवृक्क ग्रंथियों सहित पूरे उदर व श्रोणी प्रदेश को पुष्ट बनाता है. 
ü मुंडूकासन : पैंक्रियाज से इन्सुलिन रिलीज करने में सहायता देता है. इम्युनिटी बढ़ाता है. मधुमेह, कोलाइटिस जैसी तकलीफों में फायदेमंद होता है. 
ü उत्तानपादासन : हाजमें को दूरुस्त रखने के साथ ही तंत्रिका तंत्र को भी मजबूत बनाता है.


बुधवार, 17 जून 2020

अनलॉक-1 में खुद को बचाते हुए कैसे आगे बढ़ना है और संक्रमण से बचे रहना है कैसे?

Manoj kumar

अनलॉक-1 में खुद को बचाते हुए बढ़ना है आगे


अनलॉक-1 में जनता को काफी छूटे दी गई हैं, लेकिन कोरोना के संक्रमण का खतरा भी बरकरार है. इससे बचने के लिए शारीरिक दूरी पौष्टिक आहार और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है. अगर हम बचाव के सामान्य उपायों को गंभीरता से लें तो निश्चित ही संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे.......
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कोविड-19 के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अनलाक-1 लागू होने के बाद से यह खतरा बढ़ गया है. ऐसे में संक्रमण को लेकर तनाव में आने से बचे. इस वक्त सरकार व समाज को मिलाकर ही काम करना होगा. इस महामारी की रोकथाम के लिए विज्ञान के नियमों को मानना जरूरी है और कोरोना से बचाव के लिए भीड़ से दुरी ही सबसे अहम टानिक है.

मास्क बना जीवन का अहम हिस्सा : 

बाहर निकलते समय अपना ख्याल रखना जरुरी है. तब तक कोरोना का संक्रमण बरकरार रहेगा, तब तक मास्क को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर रखना होगा. आने वाले दिनों में इन्फ्लुएंजा का संक्रमण भी होगा. इसलिए मास्क कोरोना के साथ-साथ इन्फ्लुएंजा से भी बचाए

थूक में कई घंटे तक रहता है वायरस:

हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत एक सामाजिक बुराई है. यहाँ काफी संख्या में लोग पान मसाला, गुटखा व तंबाकू खाते हैं. जबकि यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसके बिना जीवन नहीं चल सकता. इसका सेवन छोड़कर संक्रमण को कम किया जा सकता है. इससे खुद के साथ-साथ समाज का भी बचाव होगा, क्योंकि थूक में वायरस कई घंटो तक रहता है. इस वजह से दूसरों को कोरोना का संक्रमण होने का खतरा बना रहता है. धूमपान भी कतई न करें और यदि कोई धूमपान करता है तो उसे भी मना करें. वैसे भी सार्वजनिक स्थान पर धूमपान व थूकना गैरकानूनी है और इस पर जुर्माने का प्रावधान है.

जरूरी हो तो ही जाएं बाजरा:

कई लोगों को बाजार में घूमने की आदत होती है. बाजार में भीड़ अधिक होती है और शारीरिक दूरी के नियम का पालन आसान नहीं होता. बहुत जरुरी होने पर ही बाजार जाएँ. अब तो शहरों में बहुत सारी चीजें आनलाइन शापिंग का इस्तेमाल करें. अगर बाजार जाएँ तो शारीरिक दूरी का विशेष ख्याल रखें.

ज्यादा घाटक नहीं है वायरस :

तमाम बचाव के उपायों को अपनाने के बावजूद यदि कोई संक्रमित हो भी जाए तो ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह वायरस बहुत ज्यादा घातक नहीं है. देश में ज्यादातर लोगों में हल्का संक्रमण देखा जा रहा है. हल्का संक्रमण होने पर घबराकर तत्काल अस्पताल जाने से बचें. यदि हल्का संक्रमण है तो पांच से सात दिन में यह बीमारी ठीक हो जाती है. इसलिए खाँसी, जुकाम है तो घर में भी परिवार के अन्य सदस्यों से दूरी बनाकर रह सकते हैं. गले में खराश है तो गुनगुने पानी से गरारे करें. इसके अलावा भाप लें. यदि हल्का बुखार है तो उसकी दवा ले सकते हैं. यदि बुखार ज्यादा हो तो अपस्ताल में भर्ती होने की जरूरत है. इस तरीके से ही महामारी से पार पाया जा सकता है.

पौष्टिक आहार है जरूरी :

खानपान में दूध, पनीर, दाल सहित अन्य पौष्टिक चीजों का सेवन संतुलित मात्रा में करें. फल व हरी सब्जियों को नियमित रूप से भोजन में शामिल करें. भोजन पौष्टिक और हल्का ही लें और अधिक खाने से बचें. व्यायाम करते रहें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ. इसके अलावा पूरी नींद लें. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहेगी.

दफ्तर से आने के बाद करें स्नान :

दफ्तर से आने के बाद कई लोगों ने एक अच्छी आदत यह शुरू कर दी है कि जूते घर से बाहर निकालने के बाद सीधे नहाने जाते हैं. इसका पालन सभी लोगों को करना होगा. दफ्तर से घर पहुँचने के बाद अपने कपड़े साफ़ करें और स्नान जरूर करें. घर में कोई बुजुर्ग हो तो उनके पास जाने से बचें.

खुद को रखना होगा ध्यान :

अनलाक-1 में कुछ धार्मिक स्थल भी खुल गए हैं. लगभग ढाई माह से लोग धार्मिक स्थलों पर नहीं जा रहे थे. इस संक्रमण के बीच धार्मिक स्थल पर जाने कोई बहुत जरुरी काम नहीं है. वहाँ होने वाली भीड़ से खतरा हो सकता है. दुनिया में ऐसे कई उदाहरण मिले जब धार्मिक स्थलों पर भीड़ होने के कारण कोरोना का संक्रमण हुआ. इटली में चर्च की भीड़ से सक्रमण का मामला सामने आया था.

दूरी बनाकर रखें :

दफ्तर में भी घर की तरह साफ-सफाई होनी चाहिए. प्रतिदिन दो से तीन बार दफ्तर की सफाई जरुरी है. इसके अलावा, कर्मचारियों के हैण्ड वाश के लिए पूरी व्यवस्था होनी चाहिए कर्मचारी कम से कम दो मीटर की दूरी बनाकर रहें. व्यक्तिगत आदान-प्रदान कम होना चाहिए और एक-दूसरे से खाने का सामान कम ही साझा करना चाहिए.

तो न करें सफर :

यदि खाँसी, जुकाम व हल्का बुखार हो तो दफ्तर न जाएं. खाँसी जुकाम होने पर सार्वजनिक वाहनों में सफर भी न करें, क्योंकि इससे दूसरों को संक्रमण हो सकता है. सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय मास्क पहनकर रहें. कैब में चालक को भी मास्क पहनकर रहना जरूरी है. बचाव के लिए बस, रेलवे स्टेशन व सभी दफ्तरों में थर्मल स्कैनिंग की सुविधा जरुरी है.    

मंगलवार, 16 जून 2020

क्या आप जानते हैं अनार से क्या-क्या लाभ मिलता है II अनार से आती है तुरंत एनर्जी

Manoj kumar

अनार से आती है तुरंत एनर्जी


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अनार के लाल-लाल दाने

लाल-लाल मोतियों से भरे अनार के टुकड़े न केवल देखने में सुन्दर लगते हैं, बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं. यही कारण है कि अनार को फलों की श्रेणी में शीर्ष स्थान पर रखा जाता है. अगर आपको भी अनार खाना अच्चा लगता है तो आपके लिए यह और खुश होने की बात है. कारण, हाल ही में हुए शोध-अध्ययनों से यह पता चला है कि अनार का सेवन करने से शरीर में तुरंत एनर्जी (उर्जा) आती है. हाल ही में अमेरिका की इंडियन स्टेट यूनिर्वसिटी में हुए अध्ययनों से पता चला है कि अनार का सेवन करने से शरीर के लिए आवश्यक, प्रोटीन, फोलेट, पोटैशियम आदि पोषक तत्व प्राप्त होते हैं.

आधुनिक लाइफ स्टाइल के चलते आजकल लोग कई समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं, जैसे ब्लड प्रेशर हाई होना, टेंशन या डिप्रेशन की शिकायत और हृदय संबंधी समस्याएँ. अनार के सेवन से इस प्रकार की समस्याओं से पीड़ित नहीं होना पड़ता है. यही नहीं अनार का सेवन करने से शरीर बैक्टीरिया व फंगल इन्फेक्शन से भी बचा रहता है.
अध्ययनों से पता चलता है कि अनार का जूस पीने से मेमोरी भी तेज होती है. कारण, इसमें मिलने वाले पोषक तत्व दिमाग में स्रावित होने वाले विभिन्न केमिकल्स की मात्रा मो सही रखते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अनार लाइफ को स्वस्थ बनाने में काफी मददगार साबित होता है. यह हड्डियों और मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है. इस प्रकार से यह जोड़ों के दर्द से भी राहत दिलाता है. अनार का सेवन करने से खून की कमी दूर होती है. यह मूड को खुशनुमा बनाने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने में भी सहायक होता है.

सोमवार, 15 जून 2020

क्यू जरूरी है हाथ धोना II हाथ साफ रखने लाभ क्या है जानते है आप

Manoj kumar

क्यू जरूरी है हाथ धोना

कोरोना वायरस के मामले में हैण्ड वाशिंग को बहुत महत्व दिया जा रहा है. वजह है कि इसका संक्रमण हाथों के जरिए ही सबसे अधिक फैलता है. कुछ लोग पूछते हैं कि बार-बार हाथ धोने से क्या होगा? आइए जानते हैं कि हाथ नहीं धोने से क्या-क्या हो सकता है.......
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चिकित्सक विज्ञान मानता है कि संक्रामक बीमारी से बचने के लिए हाथ धोने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है. इससे हाथों में लगा संक्रमण निकल जाता है. एक अध्ययन के अनुसार हमारे देश में 40 प्रतिशत लोग खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते हैं. इसी अध्ययन के मुताबिक यदि हाथ धोने की प्रक्रिया पूरी ईमानदारी से निभा लें तो हर साल लाखों लोगों की जान बच सकती है.

एक से दूसरे तक पहुँचते हैं रोगाणु :

बात केवल कोरोना तक ही सीमित नहीं है. हाथ संक्रमित हों और उन्हें धोकर साफ न किया जाए तो कई संक्रमण रोगाणु परिजनों और मित्रों तक पहुँच सकता है. दरवाजे का हैंडल, टायलेट या बाथरूम के दरवाजे का हैंडल, नल की टोंटी, रेलिंग, लिफ्ट के बटन और ऐसे ही अनेक स्थान है, जो आमजन के साथ-साथ आपके इस्तेमाल में भी आते हैं और संक्रमित करते हैं.

पकड़ लेगी गंभीर बीमारी :

रोगाणु संपर्क के जरिए शरीर म आसानी से पहुँच जाते हैं. यदि आपको हाथ पहुंचाने की आदत है तो अनजाने में ही आपके हाथों का संक्रमण मुँह और आँखों को प्रभावित करेगा. इन संक्रमणों की वजह से आप गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं.

ऐसे धोये हाथ :

याद रखें की सेनिटाइजर से अधिक प्रभावशाली होता है साबुन से हाथ धोना. हाथों में साबुन लगाकर देर तक रगड़े, झाग निकलने का इंतजार करें, हथेलियों और पिछले हिस्से सहित अंगुलियों को भी रगड़कर साफ करें. अधिक पानी से पूरा झाग निकालें.

हो सकता है पेट का संक्रमण :

कोरोना वायरस के बाद सबसे अधिक तकलीफदेह है पेट का संक्रमण. यह रोगाणु दूषित पानी एवं संक्रमित हाथों से शरीर में पहुँचते हैं, जिसके कारण टायफाइड और कालरा जैसे घाटक रोगों का संक्रमण पैदा होता है. डारिया के 10 में से 4 मामलों को सही तरीके से हाथ धोकर रोग की चपेट में आने से बचाया जा सकता है.

आँखों के संक्रमण को रखें दूर :

हैण्ड वाशिंग का एक और महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे आँखों को होने वाले संक्रमण से बचाया जा सकता है. संक्रमित हाथों के जरिए ही कंजेक्टिवाइटिस और ट्रेकोमा जैसे आँखों के संक्रामक रोग फैलते हैं. ट्रेकोमा एक ऐसा बैक्टीरियल संक्रमण है, जो दुनिया भर में अंधत्व का कारण हैं.

बचाए त्वचा के सक्रमण से :

स्टेफिलोक्काकस, ऐसा बैक्टीरिया है जो शरीर की त्वचा और नथुनों में पाया जाता है. यदि ये रोगाणु खुले घावों तक पहुँच जाएँ. तो त्वचा का संक्रमण हो जाता है. त्वचा के अंदर सॉफ्ट टिश्यू तक उतरकर ये बैक्टीरिया शरीर के जोड़ों और हड्डियों तक पहुंचता है. हैण्ड वाशिंग से इसका संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है.