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मंगलवार, 26 मई 2020

इम्युनिटी पावर कैसे बढ़ाएं I Good Tips for Good health I स्वस्थ्य रहने का राज जाने

इम्युनिटी के लिए ठीक रखें पाचनतंत्र

भागदौड़ भरी जिन्दगी में सामान्य दिनचर्या को प्रभावित किया है. लंबे समय से लगातार घर में रहने और आउटडोर एक्टिविटीज बंद होने के कारण शारीरिक निष्क्रियता में भी वृद्धि हुई है, जिसके चलते लोगों में पंचनतंत्र बिगड़ रहा है और कब्ज, एसिडिटी, पेट में भारीपन तथा अपच की समस्याएं बढ़ गई है.कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए आयुष मंत्रालय की एड्वाजारी के परिपालन की सलाह का सीधा अर्थ है कि हमें लॉकडाउन के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखना है. यह तभी संभव है जब हमारी दिनचर्या सुव्यस्थित होगी और पाचनतंत्र सुचारू रूप से काम करेगा. गुनगुने पानी का सेवन इस दिशा में बेतर उपाय है. आयुर्वेद के अनुसार खान-पान में कुछ सामान्य चीजों को आदत में लाने से पाचनतंत्र सक्रिय बना रहता है, जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है.अधिसंख्य लोग भोजन के पाशचात ठण्डा पानी पीते हैं, जो पाचनतंत्र को सुस्त बनाता है. इससे एब्सर्प्शन, एसिमिलेशन, मेटाबालिज्म और डाइजेशन ठीक से काम नहीं कर पाते. परिणामस्वरूप सही से पच न सका भोजन टाक्सिन में परिवर्तित हो जाता है. गुनगुना पानी पाचन क्रिया को तेज कर देता है. परिस्थितियों को देखते हुए इस संक्रमण काल में आयुर्वेद में वर्णित जीवनशैली, संतुलित भोजन, आहार-विहार, घर पर ही व्यायाम, योग, प्राणायाम सेहत के लिए बहुत जरूरी है.
 Immunity, इम्युनिटी

Immunity

सुपाच्य भोजन व सकारात्मक सोच को होना बहुत ही जरूरी है एक अच्छी सेहत के लिए :

    1.            मूँग की दाल, दलीय, लौकी, पपीता, खीरा आदि का सेवन        आवश्य करें. 
    2.            हरीसब्जियाँ व विटामिन सी युक्त फलों का नियमित सेवन       करें. 
    3.            दही व छाछ पांचनतंत्र को सक्रिय बानाएगा. 
    4.            एंटिऑक्सीडेंट युक्त सूखे मेवों का सीमित मात्रा में प्रयोग        करें 
    5.            आंवला पाउडर का सेवन पाचन तथा प्रतिरोधक क्षमता को        मजबूत बनाता है. 
    6.            लौंग, कालीमिर्च की एंटी बैक्टीरियल प्रापर्टीज पाचन के          लिए लाभदायक है. 
    7.            दालचीनी तथा मेथी मेटाबालिज्म ठीक रखते हैं. 
    8.        तुलसी तथा हल्दी में एंटी बैक्टीरियल और एंटीइन्फ्लेमेटरी       गुण होते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाते हैं, जो इम्युनिटी बढाते          हैं. 
    9.            लहसून, अदरक, नींबू का सेवन जरूर करें. 
10.            पर्याप्त मात्रा में निंद भी जरूरी है लेकिन असमय सोने से       बायोलोजिकल क्लाक डिस्टर्ब होती है और इससे पाचनतंत्र        प्रभावित होता है. 
11.            कोरोना के संक्रमण काल की अनिश्चिता को लेकर तनाव        न लें. 
12.    भय, गुस्सा और उझन के कारण एंजाइम का स्राव             असन्तुलित होने से पित्त बढ़ता है, जो पाचनतंत्र को ख़राब       करता है.

इन्हें भी जरूरी रूप से अपनाना चाहिए

गरिष्ठ तेल- भुने भोजन तथा जंक फूड से परहेज करें.घर में है तो इसका मतलब यह नहीं कि चाय काफी का सेवन बढ़ा दे.
लॉकडाउन परिस्थितियां समस्या है, इसलिए तनावमुक्त होकर समय बिताएं.किसी भी तरह की समस्या होने पर खुद से पाचन न करें. तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज कराएं
भले ही यह समय घर में बीत रहा है लेकिन अपनी दिनचर्या और खान-पान समय ही रखें.

सोमवार, 25 मई 2020

सेहद I healthy


सेहद

स्वाद मिले सेहत के साथ

लॉकडाउन में मिला सबसे बड़ा सबक यह है कि उम्दा सेहत अच्छे और घर के बने आहार से ही हासिल हो सकती है. आइए मेडिकल साइंस के इस संदेश को अपनी दिनचर्या का अंग बना ले और अपने आहार को औषधि का रूप डे
सेहद, health
सेहद / health

नारी शक्ति से आवार्ड से सम्मानित डॉ. नंदिता शाह, जो वीगन अहारा से संबंधित संस्था शरण की संस्थापक भी हैं, के अनुसार अपनी सेहत दुरुस्त रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा फल खाने चाहिए. शक्कर व अन्य मीठे पदार्थ कम खाने चाहिए. प्राकृतिक मिठास के लिए खजूर, किशमिश अच्छा विकल्प डॉ. नंदिता के अनुसार मेवे, बीज तथा नारियल सेहत को सही सही रखने में बहुत मदद करते हैं. जबकि बसयुक्त पदार्थ नकसान करते हैं. वनस्पति आयल वसायुक्त होते हैं. और इनमें फाइबर नही होता है. इसलिए कम से कम तेल में भोजन पकाना चाहिए. इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है कि मेवों में वसा की मात्रा ज्यादा होती है. इसलिए ज्यादा मेवों का सेवन भी उचित नहीं. पौधों में पाए जाने वाले अनेक विटामिन्स हमारी सेहत सही रखते हैं. यदि हम पौधों से प्राप्त होने वाले विभिन्न खाद्द पदार्थ ग्रहण करते हैं तो अनेक बीमारियों से बचे रह सकती हैं. मैं सभी को अक्सर ग्रीन स्मूदी पिने की सलाह देती हूँ यानी हरि पत्तीदार सब्जियों से बने पेय. ये कल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स का अच्छा स्रोत हैं. इन्हें बहुत आसानी से घर पर बना सकती हैं कुछ रेसिपी आपके साथ साझा कर रहा हूँ.
ग्रीन स्मूदी
यह हृदय तथा पाचन संबंधी समस्याओं से बचाती है साथ ही कई तरह की एलर्जी से भी दूर रखती है. यह हमारी सेहत सही रखती है.

सामाग्री

v पालक की 10-15 पत्तियां
v एक टी कप पुदीने की पट्टियाँ
v एक इंच टुकड़ा अदरक
v थोड़ी सी पीसी हल्दी
v एक किवी या प्लम या नाशपाती
v एक मौसम या संतरा
v आधा टी कप पाइनएप्पल के तुकडे या एक केला
v आवश्यकतानुसार पानी

विधि

सारी सामाग्री ब्लेंडर में डालकर ब्लेंड करें और गिलास में डालकर स्वयं लें साथ ही घर के लोगों को भी पिलाएं
विटामिन सी ड्रेसिंग
यह हमें अपनी सेहत दुरुस्त रखने के लिए विटामिन सी का सेवन बहुत जरूरी है. यह रेसिपी अनेक रोगों से बचाएगी

सामाग्री

·       एक टी कप संतेरे के टुकड़े
·       तीन बड़ी चम्मच तिल
·       एक काली छिला हसून
·       दो खजूर गुठिली निकले हुए
·       आवश्यकतानसार पानी
·       एक बड़ी चम्मच सोया सॉस
·       स्वादानुसार नमक

विधि

सारी सामाग्री को मिक्सी में डालिए और पहले आधे पानी के साथ ब्लेंडर करें. इसके बाद बचा हुआ पानी डालकर एक बार फिर ब्लेंड करें. अब इसे कलौंजी से गार्निश कर परोसें. तिल की जगह किसी मेवे या बीज का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
भेल चाट है हेल्दी

सामाग्री

Ø दो टी कप लईया (मुढ़ी)
Ø एक चौथाई टी कप खजूर इमली की चटनी
Ø दो बड़ी चम्मच हरि चटनी
Ø एक चौथाई टी कप बारीक कटा प्याज
Ø उबला व कटा हुआ एक आलू आधा खीरा बारीक कटा हुआ
Ø नमक स्वादानुसार चाट मसाला

विधि

सारी सामग्री को एक बर्तन में अच्छी तरह मिक्स करके परोसे. आप चाहे तो चने भी इसमें डाल सकते हैं. 

रविवार, 24 मई 2020

द्रोपदी माला फूल I Draupadi Mala Flowers


द्रोपदी माला फूल

धार्मिक, ऐतिहासिक और औषधीय विरासत से जुड़े द्रोपदीमाला फूल पुष्प की सुगन्ध देव भूमि से भी महकेगी . द्रोपदी के गजरे पर सजने वाला यह पुष्प सीता माता को भी प्रिय था.इसी धार्मिक महत्त्व को देखते हुए इसे सहेजने में जुटे उत्तराखंड के वन महकमें को सफलता भी मिल गई है.
असम और अरुणाचल प्रदेश के राज्य पुष्प द्रोपदीमाला को यहाँ फारेस्ट ट्रेनिंग सेंटर हल्द्वानी की नर्सरी में तैयार कर लिया है. औषधीय गुणों वाले इस पुष्प का किडनी और गठिया समेत तमाम रोगों के उपचार में भी बड़ा महत्त्व है. माना जाता है कि महाभारत काल में में रानी द्रोपदी माला और गजरे के तौर पर इन सुगन्धित फूलों का इस्तेमाल करती थी. इसी वजह से इसका नाम द्रोपदीमाला भी पड़ा. यही नहीं, वनवास के दौरान सीता माता से भी इस पुष्प के जड़व का वर्णन मिलता है. यही वजह हा कि महराष्ट्र में इसे सीतावेणी के नाम से जाना जाता है. द्रोपदीमाला के औषधीय गुणों की वजह से ही इसकी खासी डिमांड भी है. इसलिएआंध्रप्रदेश में इसकी तस्करी भी होती है. पश्चिम बंगाल और असम में इसे कुप्पु फूल के नाम से जाना जाता है. वन विभाग दुलर्भ ऐतिहासिक और औषधीय महत्व वाली वनस्पति को सुरक्षित करने के साथ ही उनके संवर्धन की मुहीम में भी जूटा हुआ है.
इसका इस्तेमाल अस्थमा, किडनी स्टोन, गठिया रोग और घाव भरने में दवा के तौर पर किया जाता है.
वन सरंक्षक का वनवास के समय श्रीराम पंचवटी (नासिक) में रुके थे, तब सीता माता इन्हीं फूलों से श्रृंगार करती थीं. इसे प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है.असम का बिहू नृत्य दुनियाभर में पसिद्ध है
सांस्कृतिक कार्यक्रम से लेकर शुभ अवसर पर महिलाएं बिहू नृत्य करती है. मान्यतानुसार वहाँ इस दौरान महिलाएं बालों में द्रौपदी माला फूल को जरूर लगाती है.
द्रोपदीमाला आर्किड प्रजाति का पुष्प है. आर्किड जमीन औरपेड़ दोनों पर होता है. आमतौर पर 1500 मीटर ऊँचाई पर मिलने वाला यह फूल बांज और अन्य पेड़ों के सहारे बेल के आकार में बढ़ता है. इसका अंग्रेजी नाम फॉक्सलेट है.